भारतकोश
ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्

Ishadi Nau Upanishad

ऋषिगण द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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( १८ )

मन्त्रविषयपृष्ठ

तृतीय अध्याय

( प्रथम खण्ड )

पूर्वोक्त परमात्मा और जीवात्मा इन दोनोंमेंसे उपास्यदेव कौन है? और किसके सहयोगसे मनुष्य रूप आदि विषयोंका अनुभव करता है? इसके निर्णयार्थ ऋषियोंका विचार..... ३२५
'मनकी देखना, सुनना, मनन करना आदि शक्तियाँ ज्ञानरूप परमात्माके ही नाम हैं'—इस तथ्यके अनुशीलनसे परमात्माकी सत्ताके ज्ञान होनेका कथन..... ३२६
समस्त जगत्के रचयिता, संचालक, रक्षक और आधारभूत प्रज्ञानस्वरूप परमात्मा ही उपास्यदेव हैं—इस प्रकार ऋषियोंका निश्चय करना..... ३२७
उस प्रज्ञानस्वरूप परमेश्वरके ज्ञानसे शरीर-त्यागके अनन्तर परम धाममें जाकर अमर हो जानेका निरूपण..... ३२८
शान्तिपाठ..... ३२९

( ८ ) तैत्तिरीयोपनिषद्

उपनिषद्के सम्बन्धमें प्राक्कथन तथा शान्तिपाठ..... ३३०

( शीक्षा-वल्ली )

अनुवाक

आचार्यद्वारा विभिन्न शक्तियोंके अधिष्ठातृ-देवताओंके नामसे परमेश्वरकी स्तुति-प्रार्थना करके उनकी वायुनामसे स्तुति और वन्दना३३०
वेदमन्त्रोंके उच्चारणके नियमोंको कहनेकी प्रतिज्ञा करके उनका संक्षेपमें वर्णन..... ३३३
लोक, ज्योति, विद्या, प्रजा और शरीरविषयक पाँच प्रकारकी संहितोपासनाके प्रकरणमें अभीष्ट लोकप्राप्तिके उपायका, ज्योतियोंके संयोगसे भौतिक पदार्थोंकी उत्पत्तिके रहस्यका, विद्याप्राप्तिके रहस्यका, संतानप्राप्तिके उपायका एवं वाणीद्वारा प्रार्थनासे शरीरकी उत्पत्ति और नामजपसे भगवत्प्राप्तिके उपायका तथा इन पाँचोंके ज्ञानसे पृथक्-पृथक् फल पानेका कथन..... ३३५