जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा
स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें[ १४ ] विषय पृष्ठ १६२. सन्थव जातक .. .. .. .. १८८ [ ब्राह्मण ने घी मिश्रित खीर अग्नि भगवान को पिलाई । अग्नि भगवान ने उसकी पर्णकुटी जला डाली । ] १६३. सुसीम जातक .. .. .. .. १९० [ सुसीम राजा ने समझा कि उसके पुरोहित का लड़का न तीनो वेद जानता है न हस्ति-सूत्र । किन्तु यह सोलह वर्ष का बालक एक ही रात में तक्षशिला से तीनो वेद और हस्ति-सूत्र सीख आया । ] १६४. गिज्झ जातक .. .. .. . १९६ [ गृद्धो ने अपनी कृतज्ञता प्रगट करने के लिए लोगो के वस्त्राभरण उठा उठा कर सेठ को लाकर दिए । ] १६५. नकुल जातक .. .. .. .. १९९ [ बोधिसत्त्व ने नेवले और सांप की दोस्ती करा दी । ] १६६. उपसाळ्हक जातक .. .. . .. २०१ [ उपसाळ्हक ब्राह्मण मरने पर ऐसी जगह जलाया जाना चाहता था जहां पहले कोई न जलाया गया हो । लेकिन ऐसी जगह कहां ? ] १६७. समिद्धि जातक .. .. .. .. २०४ [ देवकन्या ने भिक्षु के सुन्दर शरीर पर आसक्त हो उसे काम-भोगों का निमन्त्रण दिया । भिक्षु ने बिना काम- भोगों को भोगे भिक्षु बनने का कारण बताया । ] १६८. शकुणग्घि जातक .. .. .. .. २०७ [ बटेर ने अपने गोचर स्थान पर रह कर बाज की भी जान ले ली । ] १६९. अरक जातक .. .. .. .. २१० [ मैत्री भावना का माहात्म्य । ]