जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा
स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें[ १७ ] विषय पृष्ठ १८७ चतुमट्ठ जातक २६७ [ हंस बच्चे वृक्ष पर बैठ बातचीत करते थे। सियार बोला—नीचे उतरकर बातचीत करो, जिसे मृगराज भी सुने। ] १८८ सीहपोत्युक जातक २६६ [ गीदड़ी से सिंहपुत्र पैदा हुआ। उसकी शक्ल सूरत थी सिंह जैसी किंतु स्वर शृगाल का सा। ] १८६. सीहचम्म जातक २७१ [ सिंह की खाल पहन कर गधा खेत चरता रहा , किंतु बोलने पर मारा गया। ] १६० सीलानिसंस जातक २७३ [ शील के प्रताप से एक आर्य्य-श्रावक ने अपने साथ एक नाई को भी नौका पर समुद्र पार लँघाया। ] • रूहक वर्ग २७६ १६१ रूहक जातक २७६ [ ब्राह्मणी ने ब्राह्मण के साथ मजाक किया। उसने गुस्से हो उसे तलाक दे दिया। ] १६२ सिरिकालकण्णि जातक २७८ [ यह जातक महाउम्मग्ग जातक (५४६) में आएगी। ] १६३ चुल्लपदुम जातक २७६ [ सात भाई छ भाइयो की स्त्री को मार कर खा गए। बोधिसत्त्व अपनी स्त्री को लेकर भाग निकल। उस स्त्री ने कृतघ्नता की हद कर दी। ] १६४ मणिचोर जातक २८५ [ राजा ने स्त्री पर मुग्ध हो उसके पति पर मणि चुराने का झूठा अपराध लगाकर उसे मरवाना चाहा। वह स्वयं मारा गया। ] २