भारतकोश
जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा

स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)

DevanagariHindipublished479 पृष्ठ

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अलीनचित्त ] १६३ आज से सातवें दिन राज्य न देकर युद्ध करगे। इतने दिन प्रतीक्षा करें।" राजा ने 'अच्छा' कह स्वीकार किया। देवी ने सातवें दिन पुत्र को जन्म दिया। लोगो ने कहा यह हमारे उदा- चित्त की उदासी को दूर करता हुआ पैदा हुआ है, और उसका नाम अलीनचित्त कुमार रक्खा। उसके पैदा होने के ही दिन से नगर-निवासी कोसल-नरेश के साथ युद्ध करने लगे। युद्ध का नेता न होने से बडी सेना भी युद्ध करती हुई थोडी थोडी पीछे हटने लगी। आमात्यों ने रानी से यह समाचार कह पूछा— "आर्ये ! इस प्रकार सेना के पीछे हटने से हमें डर लगता है कि हम हार न जाएँ। राजा का मित्र मगल हाथी न राजा के मरने की बात को जानता है, न पुत्र उत्पन्न होने की बात जानता है और न कोसल-नरेश के आकर युद्ध करने की बात जानता है। हम इसे यह सब कह दें ?" उसने 'अच्छा' कह स्वीकार किया। फिर पुत्र को अलंकृत कर कोमल वस्त्र की गद्दी पर लिटा महल से उतर आमात्यों को साथ ले हस्ति शाला में गई। यहाँ बोधिसत्त्व को हाथी के पैरो पर रख कर बोली— 'स्वामी ! तुम्हारा मित्र तो मर गया। हमने तुम्हारे हृदय के फट जाने के डर से तुमसे नहीं कहा। यह तुम्हारे मित्र का पुत्र है। कोसल-राजा आकर नगर को घेरे हुए तेरे पुत्र से युद्ध कर रहा है। सेना पीछे हट रही है। या तो तू अपने पुत्र को स्वय ही मार डाल अथवा राज्य जीतकर इसे दे।" उसी समय हाथी ने बोधिसत्त्व को सूण्ड में ले उठा कर सिर पर रक्खा। रोया पीटा। फिर बोधिसत्व को उतार कर देवी के हाथ में लिटाया और कोसल-नरेश को पकडने के लिए हस्ति-शाला से निकल पडा। मन्त्री-गण कवच उतार, सज सजाकर दरवाजे खोल उसके पीछे पीछे हो लिए। हाथी ने नगर से निकल क्रौंच-नाद किया। लोगो को डरा कर भगा दिया। सेना की पाँत को तोड कोसल-राजा को पाँवो मे पकड लाकर बोधिसत्व के पैरो मे डाल दिया। वह मारने के लिए उठा, तो उसे रोका। अब से सावधान रह। यह मत समझ कि कुमार बालक है। इस प्रकार उपदेश दे उसे उत्साहित किया।