जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा
स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें[ ७ ] विषय पृष्ठ ११८. वट्टक जातक (२) ३३ [ चिड़ीमार का दिया दाना-पानी ग्रहण न कर बटेर अपनी होशियारी से बन्धनमुक्त हुआ । ] ११९. अकालरावी जातक ३७ [ असमय शोर मचाने वाला मुर्गा विद्यार्थियो द्वारा मार डाला गया । ] १२० बन्धनमोक्ख जातक ३६ [ राजा को धोखे म रख उसकी रानी ने चौसठ मनुष्या से सहवास किया । पुरोहित ने पाप भीरुता के कारण ऐसा न किया । रानी ने पुरोहित पर झूठा इल्जाम लगा उसे बंधवा दिया । सच्ची बात प्रगट कर पुरोहित स्वय मुक्त हुआ और अपन साथ उन चौसठ आदमियो तथा रानी की भी जान बचाई । ] १३ कुसनाळि वग्ग ४४ १२१ कुसनाळि जातक ४४ [ बोधिसत्त्व ने गिरगिट का रूप धारण कर वृक्ष देवता के निवास स्थान मग्ल-वृक्ष को न कटने दिया । ] १२२ दुम्मेध जातक ४८ [ राजा अपन मगल हाथी की प्रशसा सुन ईर्ष्या के वशीभूत हो गया । उसने उसे मरवाना चाहा । महावत का जब यह पता लगा तो वह उसे आकाश मार्ग से काशी ले आया । ] १२३ नङ्गलीस जातक ५१ [ आचार्य ने जड-बुद्धि शिष्य को जो देखे सुने उसकी उपमाओ्र द्वारा विद्या सिखानी चाही । किन्तु वह हर चीज की उपमा केवल हल की फाल से ही देता रहा । आचार्य को हार माननी पडी । ]