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ज्ञानयोग (स्वामी विवेकानन्द - हिन्दी अनुवाद)

ज्ञानयोग (स्वामी विवेकानन्द - हिन्दी अनुवाद)

Jnana Yoga - Swami Vivekananda (Hindi)

स्वामी विवेकानन्द द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

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ज्ञानयोग

१. संन्यासी का गीत

छेड़ो संन्यासी, छेड़ो, छेड़ो वह तान मनोहर,
गाओ वह गान, जगा जो अत्युच्च हिमाद्रि-शिखर पर—
सुगंभीर अरण्य जहाँ है, पार्वत्य प्रदेश जहाँ है,
भव-पाप-ताप ज्वालामय करते न प्रवेश जहाँ है—
जो संगीत-ध्वनि-लहरी अतिशय प्रशान्त लहराती
जो भेद जगत् कोलाहल नभ-अवनी मे छा जाती,
धन-लोभ, यशोलिप्सा या दुर्दान्त काम की माया
सब विधि असमर्थ हुई है छूने में जिसकी छाया,
सत्-चित्-आनन्द-त्रिवेणी करती है जिसको पावन,
जिसमे करके अवगाहन होते कृतकृत्य सुधीजन—
छेड़ो छेड़ो, हाँ छेड़ो वह तान दिव्य लोकोत्तर,
गाओ, गाओ संन्यासी, गाओ वह गायन सुन्दर—
ॐ तत् सत् ॐ

तोड़ो जंजीरे जिनसे जकड़े हैं पैर तुम्हारे—
वे सोने की है तो क्या कसने में तुमको हारे ?