कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1023, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंअंग्रेजी मछसे मृत्यु—एक प्रकारकी अंगरेजी मदिरा होती है, जिसमें भङ्ग मिलाते हैं, नशा तेज होनेके लिये कुचला भी मिला दिया करते हैं। हृदयमें उनका विष स्थान बना लेता है उसको कमजोर कर देता है, अन्तमें मनुष्य मर जाता है।
कोढ़की बीमारी—मदिरा पीनेसे कोढ़ उत्पन्न होता है, यह संसारमें दुःख और परलोकमें नरक दिखलाती है। पर मूर्ख मछपोंके लिये अनुपम पदार्थ है।
वृष्टान्त—एक मनुष्य टेम्प्रेसे सुसाइटीका पादरी था, उसके साथ उसके मछप मित्रोंने ठट्ठा किया यानी मछसे एक पीपा भरकर उसके पास भेंटके समान भेज दिया। जब वह पीपा पादरीके समक्ष आया तो उसने शराबको निकालकर एक चीनीके बरतनमें रक्खा। पहले एक शूकरको बुलाया उस बरतनको उसके सामने रख दिया कि, जिसमें शूकर कुछ पिये पर शूकर उसकी बू पातेही घबड़ाकर चिल्लाता हुआ भाग गया, उसने मदिरामें मुंह भी नहीं लगाया। पादरीने एक गदहेको बुलाया, उसके आगे भी वही शराब रखदिया, वह भी गन्ध सृंघतेही भाग गया, कुत्तेने भी वैसेही किया। फिर पादरीने उस मछको उसी पीपेमें भर और मित्रोंके पास भेजकर एक पत्र लिखा कि—
मेरे प्यारे मित्रों ! आपने मेरे पास जो भेंट भेजी उसको मैंने पहले शूकरके सामने रखी, पर उसके सृंघतेही वह विकल होकर भाग गया, पीछे क्रमशः गदहे और कुत्तेके पास भी रखी पर वे भी वैसेही घृणा करते हुए दुःखी होकर भाग गये, जिसको देखतेही कुत्ते, शूकर और गदहे भाग जाते हैं ऐसे घृणित और भयानक पदार्थ स्वीकार करनेवाला इनसे भी अधम होना चाहिये। मनुष्यके ग्रहण योग्य यह पदार्थ नहीं है। इसको तो वेही ग्रहण करे जो अपनेको उन कुत्ते आदिकोंसे भी नीच समझता होगा, इस कारण मैं इस भेंटको अपने यहाँ नहीं रखना चाहता, आपकोही मुबारक हो। यह शराब मनुष्यके लिये विष और विषोंका घर है। इन घृणित निषिद्ध मादक पदार्थोंने मनुष्यको ऐसा अन्धा कर दिया है कि, वे प्रकाशमें भी टटोलते फिरते हैं, उनको बिलकुल नहीं सूझता। सच और झूठका विवेक लोप हो गया।
ऐसेही व्यभिचार, चोरी, झूठ, ईर्षा, कपट, छल, विद्रोह, अभिमान, जूआ, नृत्य, भीख माँगना, भौड़पन आदि घृणित लज्जाहीन जितने कार्य हैं वे सब नर्ककी राह दिखलानेवाले हैं। मुक्तिमार्गके कट्टर शत्रु हैं, जो कोई मुक्ति चाहता है वो इनसे बचता रहे, नहीं तो अवश्य दुःख भोगेगा।