कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1060, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंजब ये नहीं हैं तो फिर मोक्ष कहाँ। वर्तमान कालके विद्वान् पण्डित कृपणतासे भरे हुये हैं, अभिमान और अहङ्कारके पुतले बन रहे हैं वे उदारता और भक्ति से शून्य होकर संसारमें भटकता खाते फिरते हैं।
सदाचारी—वर्तमानके विद्वानोंमें कोईही ऐसा होगा, जो प्रेम और भक्तिके पथपर चलता होगा, स्वयं सदाचारी होकर दूसरोंको सदाचारमें लगाता होगा। नहीं तो सबके सब ऐसे हैं जिनकी कि, सङ्गति करने और वचन सुननेसे अनपढ़ मूर्ख लोगभी शैतानके भाई बन गये हैं, दान, पुण्य सब छोड़ दिया है। ऐसे पठित मूर्खोंने प्रायः मनुष्योंको बहकाकर ऐसे कुमार्गमें लगा दिया है कि, बहुत यत्न करनेपर भी सुमार्गकी ओर नहीं आते सच्चे साधुओंकी सेवा तो पृथ्वीसे उठ ही गई, ढोंगी, ठग और मिथ्या स्वांगधारियोंकी पूजा होने लगी, उनके अन्तःकरणसे शुद्ध ज्ञानका बीज नष्ट हो गया। इस कालके विद्वान् प्रायः विषयी और दूसरोंको भटकानेवाले एवं अपने कहे हुये को भी न करनेवाले वे अब फलके वृक्षके समान बने हुये हैं, जो काटकर भट्ठीमें जलानेकेही योग्य होता है। विद्वान् दुराचारीका घर आग गन्धकमें है, नरकी जीव है। सदाचारी विद्वान् भाग्यवान् है।
दुराचारी—विद्वान् रूप शैतानकी बातोंको सुनसुनकर सारे संसारमें कृपणता फैल गई है। भजन, तपस्या, भक्ति, भाव और सत्य, ज्ञान विचार कहीं शेष न रहा। परमात्मा सच्चे सन्तोंके विद्वेषियोंको कभी सुख न देगा। सन्त भक्तोंको सर्वदा अपनी कृपाकी छायामें रखेगा। जो लोग सन्तोंकी निन्दा और ठट्ठा करते हैं वे कैसेही भजन पूजा और तपस्या करें पर पापीही ठहरेंगे। सन्तोंकी निन्दा करना महान् पाप है। सन्तोंकी सहायतासे सच्चे साहब मिल सकते हैं। अजर अमर पद प्राप्त हो सकता है।
सच्चे ईश्वरकी ओरसे रक्तपातकी आज्ञा नहीं—वह बिन्दी अथवा अण्ड जो पहले प्रगट हुआ, कामनाओंसे भरकर फूटा। समस्त संसारमें फैल गया। वह बन्धन है उसीसे संसार आवागमनमें पड़ा हुआ है। यह उसी विषमय वृक्षका फल है सब फलोंमें वही विष प्रवेश कर रहा है। जिस बिन्दी अथवा अण्डसे समस्त वाणी और लेख निकले वह महा असत्य है। जिसने उस अण्डको पहचाना, उसके भेदको जाना, वो सांसारिक वासनाओंसे निवृत्त हुआ। सुलेमानसे बढ़कर कोई बुद्धिमान् नहीं हुआ, सब बुद्धिमानोंमें वह शिरोमणि है, उसकी दशा देखो—पुराना अहदनामा दूसरी तबारीखका सातवां बाब—जब वह खुदाके घर गया, जितने आदमी उसके साथ थे सभोंने मिलकर २२०००