भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1077

बुल्लेशाह साहबको मर्दद और शौतान कहा करता था । हजरत शाह साहब उसकी बातोंको सुनकर धैर्यसे सन्तोष करके चुप रहते थे । एक दिन मौलवी कहने लगा कि, ऐ बुल्लेशाह ! तू जब मरेंगा तब मैं तेरा मुंह काला करवा, टोंगोंमें रस्सी बँधवा, समस्त शहरमें घसीटवाऊँगा । मौलवी उसका बड़ा काजी था, मुसलमानी राज्यमें फतवा दिया करता था बहुत बल रखता था । उसकी बातें सुनकर बुल्लेशाह साहबने कहा कि, ऐ काजी ! जब मैं मरूँगा तब तू यहाँ न होगा, मेरे मरनेके पीछे तू मरेंगा बहुत दुःख दर्दसे पड़ेगा, वहाँ तेरा प्राण न छूटेगा तब तू कुसूरमें आवेगा तो मेरे पगके नीचे गाड़ा जावेगा तभी तेरेको शान्ति होगी । अन्तमें मौलवी काबुल गया । बुल्लेशाहका देहान्त हो गया । कुसूरमें उनकी अन्तिम क्रिया हुई । वह काजी काबुलमें बीमार पडा, उसके शरीरमें बहुत जलन उत्पन्न हुई, बहुत दुःखी हुआ पर प्राण नहीं निकला, उसने कहा कि, मुझको शीघ्रही कुसूरमें बुल्लेशाहके चरणोंमें ले चलो । मौलवी बुल्लेशाहकी कब्र निकट पहुँचा तो उसका प्राणान्त हो गया बुल्लेशाहके पगकी ओर उसकी कब्र बनी है । उसकी सभी शरयतें और विद्याभिमान भूल गया, कोई काम न आया । सच्चे सन्तोंके विद्वेषियोंको कभी सुख नहीं मिल सकता ।

मृतकाचार्योंके शिष्य—विद्याभिमानियोंके कोई गुरु नहीं । केवल वे पुस्तकोंहीको गुरु माने बैठे हैं । किसी एक धर्मके आचार्यका नाम लेकर उसकी ओटमें नानाप्रकारके शुभ अशुभ व्यवहार करते रहते हैं, यद्यपि आचार्यकी सूरत भी नहीं देखी कि, वह कैसा है ? केवल किसीका नाम सुनकर उसके चेला बन जाते हैं कहते हैं । कि, हम अमुक आचार्यके अनुयायी हैं, ऐसाही है—जैसा कोई कहे कि, आकाशमें बाग लगा है मैंने उससे खूब फल तोड़कर खूब खाए जिससे पेट भर गया । ऐसे झूठ सत्य मार्गपर कभी नहीं आ सकते । जिसको मरे हुये बहुत काल बीत गया, उस आचार्यका नाम लेकर चेला बन जाना तो ऐसाही है—जैसा कोई स्त्री कहे कि, अमुक पुरुष जिसको मरे हुये अब बहुत दिन बीत गये हैं मैंने अपना पति आज बना लिया । इस प्रकारके पति बनानेसे सन्तानकी उत्पत्ति न होगी, यह सब मूर्खताका विचार है बिना गुरु चेलाके मिले कदापि ज्ञान नहीं होता । स्त्री पुरुषके संयोग बिना सन्तान उत्पन्न भी नहीं हो सकती ।

इस मण्डलीके लोगोंको आँख, कान और बुद्धि भी है पर प्रकाश और