भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1104

ब्रह्म है अथवा क्या अनेक ब्रह्मका पिता जैनियोंसे आकर कह गया है कि, अनेक आत्मा हैं। यह सब आनुमानिक बातें हैं किसीके पास न एकका और न अनेकका प्रमाण है। जिसको ब्रह्म अथवा आत्मा कहते हैं वह क्या पदार्थ है? समस्त संसारमें द्वन्द्व फैला रहा है। आत्मा २ सब कोई कहते हैं पर उसका रूप रङ्ग कोई वर्णन नहीं करता। परमात्मा आत्मा आदिक सब कल्पित नाम हैं, जिसके मनमें जैसा निश्चय हुआ कहने लगा अथवा लिख दिया। उसका नाम ठिकाना रूप रङ्ग कोई नहीं जानता। यदि वह अकहं है तो उसका कहना व्यर्थ है। यदि वह एक होता तो एकके दुखी सुखी होनेसे सभी दुखी सुखी होते। यदि वह भिन्न २ अनेक होता तो ज्ञानदशामें भी एकके अन्तरकी बात दूसरा नहीं जान सकता। यदि एक होता तो सब कोई जो चाहता सो करलेता। यदि अनेक होता तो किसी पर किसी का बल नहीं चलता। इस विचारसे एक अनेक कहना सुनना सब मिथ्या है। जो मन इन्द्रियोंसे परे सबमें पूर्ण हो उसका समाचार कौन कह सके? जो अलख है वह कैसे लखा जाये? अलखके लखनेका कोई शास्त्र नहीं जो बात कहने सुननेसे बाहर है वह कैसे कही सुनी जाय? गूं गोंने गुड़ खाया वे उसके स्वादको कैसे वर्णन कर सकें? गूं गोंने तो खाया, उसके स्वादको जाना पर स्वयं गुड़ नहीं होगया, स्वयं तो अलगही रहा। यदि गुड़ खानेसे गूं गा गुड़ हो जाता तो तत्वमसिके ज्ञानसे अपने स्वरूपका ज्ञान अवश्य होता। गुड़से और गूं गोंसे विभिन्नता है, उसी प्रकार तत्वमसिका जाननेवाला भी तत्वमसिसे भिन्न है, जीवन्मुक्तका ज्ञान भिन्न है, उसका स्वरूप भिन्न है। इसी कारण उसपर आधार रखनेसे विपत्तिमें फँसा।

गजल - जो हद पहुँचा दिया हदको अभी कुछकाज बाकी है।

न टूटा रिश्ताए दुनिया तेरा मुहताज बाकी है ॥

हज़ारों पीर पैगम्बर हिदायत आदमी की कर।

अभी सब सर गरोहोंका तू एक सिरताज बाकी है ॥

हुये सूरालख तन बरतन जतन कर बन्द करले को।

न आई ज़रगरी कुछ काम पुखता पाज बाकी है ॥

बनी आदम ब क्रिस्मत खुद बसे जा फ़र्श अशौपर।

मगर हंसोंके उस अकलीमका मआराज बाकी है ॥

रहे दौरा तेरा दायम ब दौरे दैर फानीमें।

कि जबतक कौल अइयामे निरञ्जन राज बाकी है ॥

अदाकर खुद खजानासे छुडाले अपने बन्दो को।

ब यवज जूर्म जूर्मना जो उनके बाज बाकी है ॥