कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसंकल्प द्वारा जो, पदार्थ चाहते हैं उपस्थित कर देते हैं फिर संकल्पसेही गायब भी कर देते हैं । यदि चाहें तो नियत समयतक स्थित भी रख सकें ।
कोलम्बसका अमेरिका प्रगट करनेका दृष्टान्त ।
नई दुनियाँ (अमेरिका) का प्रकाश कोलम्बस नामक जहाजीने किया था, जिसको ४०० वर्षके लगभग होता है । उसने चाहा कि, अपना जहाज उत्तर महासागरसे होकर भारतवर्षको ले जाऊँ । क्योंकि, दक्षिणसे तो अंग्रेजोंको मार्ग मालूमही है, उत्तरसे चलकर नया रास्ता निकालना अच्छा होगा । उसने सोचा कि, जब पृथ्वी गोल है तब चाहे दहिनेसे चलो, चाहे बायेंसे, अन्तमें एकही स्थानपर पहुँचना होगा । यह सोच विचार कर कोलम्बसने अपना जहाज उत्तरसे चलाया । जहाज महासागरमें पड़कर ऐसे स्थानपर जाने लगा, जहाँ पृथ्वीका भाग देख पड़ना भी कठिन हुआ । जहाज परके खानेकी सामग्री घटने लगी, यहाँतक कि, लोगोंने घोड़ोंको भी मारकर खा लिया, अन्तमें मनुष्योंको खानेकी बारी आई वरन् दो चार मारे भी गये । दो चार आदमियोंको मारकर खा लेनेके पीछे सबने आपसमें विचार करके यह निश्चय किया कि, कोलम्बसको भी मारकर खालो, उसीके कारण हमलोग इस विपत्तिमें फँसे हैं । जब कोलम्बसके मारनेकी युक्ति करने लगे तो कोलम्बसने सभोंसे कहा कि, एक दो दिन मुझे और जीवित रहने दो, यदि भूमि मिल गई तो अच्छा नहीं, तो मारकर खालेना । कोलम्बस मनमें बहुत घबड़ाया उदास हो जहाजको आगे चलाया । ईश्वरकी कृपा और लीला विचार करने योग्य है कि, जहाज बहुत दूर भी न गया होगा कि, समुद्रमें घास फूस बहे जाते देख पड़े । कोलम्बसके मनमें कुछ घैर्य हुआ, मनमें विश्वास हुआ कि, अब यहाँसे पृथिवी निकट है जिधरसे घास बही आती है पृथिवी उसी ओर है, यह अनुमान करके जहाजको भी उसी ओर चलाया । थोड़ेही दूर चलने पर अमेरिका' देश मिला जिसे कि अब नई दुनियाँ कहते हैं मिला ।
वहाँ पहुँचकर कोलम्बसने देखा कि, वहाँके लोग बड़े सरल सीधे और छल कपट रहित हैं, उनके पास धन बहुत है । कोलम्बसने दो चार तोप लगादी कई आवाजकी, जिसको सुनकर अमेरिकन लोग डर गये । उन लोगोंने आपसमें अनुमान किया कि, यह (कोलम्बस) सूर्यका पुत्र है उसकी पूजा करने लगे, उसकी आज्ञा दासके समान पूरी करने लगे । कोलम्बसने अमेरिकाका समाचार
१ इसी देशको नवीन शीक्षित लोग पाताल अथवा नागलोक कहते हैं बच्चोंको सिद्ध करनेके लिये बहुतसी युक्तियाँ भी दिखलाते हैं ।