भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 115

अब काशी कहते हैं और वाराणसीभी उसीका नाम है । क्योंकि, यह बरुणा और फारस तथा अरबके लोगों द्वारा शुद्ध उच्चारण न हो सका, इस कारण वाराणसीको लोग अब बनारसके नामसे पुकारते हैं ।

इसका समाचार तौरीतमें उत्पत्ति की किताबमें भी है कि, परमेश्वरने पूर्वमें अदनवाटिकाको बनाया, कारण यह कि, जहाँ तौरीत प्रकट हुई वहाँसे काशी पूर्व दिशामें है और इसीकी खबर मुसलमानों की हदीसोंमें है कि, आदम भारतसे मक्केका हज करनेके निमित्त गया था तथा पचास २ कोसपर इसका एक एक पग पड़ता था । कबीर साहबका कथन है कि, ब्रह्माहीको आदम कहा करते हैं, सो ब्रह्मा बनारसमें रहा करता था । इस आनन्दबनकी प्रशंसा काशी-खंड ग्रंथमें देखो । ब्रह्मा तथा शिव दोनों भाई वहाँ रहते थे । (सत्य कबीरका वचन, देखो ग्रन्थबीजक) ।

मरिगैं ब्रह्मा काशीके वासी । शम्भू सहित मुए अविनासी ॥
मथुरा मरिगैं कृष्णगुवार । मरि मरिगैं दशो अवतारा ॥

चौवालीसवाँ प्रकरण

निरंजनने सत्यलोककी नकलपर अपने लोक बनाये ।

जैसा कि, सत्यपुरुषने अपने हंसोको द्वीप द्वीपोंमें सुख पूर्वक रहनेके लिये द्वीप प्रदान किया, उसीका अनुकरण करके कालपुरुषने अमरावती, कलकावती, गोलोक, स्वर्ग, ब्रह्मलोक, साकेत इत्यादि बनाया और उनमें सुख भोगका समस्त सामान प्रस्तुत किया और नरक वैकुण्ठ इत्यादि की रचना करके सब ठीक ठौर किया, जो जिस योग्य था उसे वहाँ बैठाया । विष्णु ब्रह्मा शिव इन्द्र बरुण कुबेर इत्यादि सबको इन स्थानोंमें रखवा और आप सबसे अलग रहै । अध्याने भी अपने तीन पुत्रोंको तीनों लोकोंका राज्य सौंप दिया ।

पैंतालीसवाँ प्रकरण

तीनों पुत्रोंकी कृतघ्नता ।

जब सब स्वर्ग कैंलास वैकुण्ठ इत्यादि बना चुके और तीनों भाई तीनों लोकका राज्य करने लगे, तब तीनों भाइयोंने वही कार्य किया जो निरंजन