भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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हमें रख लीजिये खुद जा पनहमें । तु बंदीछोर सब जीवनको आधार ॥
बजुज सत्गुर हमारे कौन दे दाद । तुही है बरतरीं सब सिद्ध सालार ॥
तुही सत्पुरुष खुद धर देह आया । शरन अपनीमरखिय हमको इस बार ॥
किया तदबीर सदहा योग जप हम । न छुटकारा हुआ अज्र दस्ते जब्बार ॥
सिवा साया क्रदम तेरे न जाये । नहीं चारा कोई सूझे है नाचार ॥
तुही बन्दः नेवाजः बन्दः परवर । सिवा तेरे न रह कोई हजिनहार ॥
जियारत आपसे यह सँगे सोजों । हुआ हम सबके खातिरमिस्लगुलजार ॥
बचा लीजे बचा लीजे बचाले । हम आजिजकालके फँदेगिरफ्तार ॥
किसुन सत्गुरुका कलमः अब हैवों । हुए हैं जिन्दः हम सबजीव मुर्दार ॥
हुई शादी क्रदम कादिरके हेखे । बहर रख होरहीरहमत नमूदार ॥
कि ज़रः खाक पाए परतोअफ़ग़न । हुए जाहिर व बाहर इल्म आसार ॥
न तुझसा और कोई हर दो जहाँ में । तु आदम की मुसीबतम मददगार ॥
हुआ बद हाल मुतगय्यर हमारा । खबर लेनेको आये आप करतार ॥
हुए हम भूलके मुजरिम तुम्हार । गुनहवखसोगुनहवख शिन्दः गफ़फ़ार ॥
सुबुक कीजे हमें इस बोझसे अब । हमारे सिर गुनाहोंका है अंवार ॥
हमारे परदःको ढक मेह्म करके । तेराही नाम है मशहूर सत्तार ॥
हम आजिजखाक हैं पा पाक पाक । गुरु की मेह्म पावें असूल इसरार ॥

बावनवाँ प्रकरण

जीवोंका भक्तिकरनेकी प्रतिज्ञा करना ।

जब इस प्रकार सब जीवोंने जानीजीकी स्तुति की, तब आप अत्यन्त दयालु होकर कहने लगे कि, ऐ सब जीवो ! तुम जब सब मनुष्य देह पाओगे और मनुष्यकी देह पाकर सत्यपुरुषकी भक्ति करोगे तब, काल पुरुषके जालसे छूटोगे । तब सब जीव कहने लगे कि, हम सब अब मनुष्य शरीर पाकर सत्यपुरुषकी भक्ति को कदापि विस्मृत न करेंगे अबतक हम सब लोक तथा वेदके धोखेमें आनकर, कालपुरुषको सत्य पुरुष समझते थे और उसकी भक्ति करतेथे इस कारण हमारी ऐसी दुर्दशा हुई, हमलोग लोक तथा वेदके बंधनमें भूल गये, अब कदापि न भूलेंगे, न धोखेमें पड़ेंगे । यह बात सुनकर जानीजीने मुसकुराकर कहा कि, हे जीवो ! जब तुम मनुष्यतन पाओगे तो यह सब भूल जावोगे ; कालपुरुष फिर तुम्हारी बुद्धिको गोता देने लगेगा किन्तु, तुममेंसे जो कोई सत्यगुरुका कहना मानेगा और