भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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उत्तर—मनुष्यको भूख प्यास लगनेकी क्या आवश्यकता है ? जब भूख प्यास लगती है तो भोजन और जलके ग्रहणमें परवश प्रवृत्ति होती ही है । उसी प्रकार ब्रह्ममें माया फुरती है तो सृष्टि स्वाभाविकही प्रगट होती है ।

४२ प्रश्न—कार्य सिद्ध न होने का कारण, नानाप्रकार परिश्रम करने पर भी कार्य सिद्ध नहीं होता. इसका क्या कारण है ?

उत्तर—ईश्वरच्छा विरुद्ध अथवा प्रारब्धिही इसका कारण है ।

४३ प्रश्न—शुद्धधर्म, वह कौन धर्म है जो सब प्रकार शुद्ध है ?

उत्तर—वह धर्म कबीर साहबका है ।

४४ प्रश्न—भक्तिका निर्वचन, भक्ति किसको कहते हैं ?

उत्तर—भगसे पार होजाने का नाम भक्ति है । जबतक यह भगमें आया जाया करता है तबतक भक्ति पद नहीं मिलता । तबतक कोई भक्त नहीं हो सकता जबतक भगसे छुटकारा नहीं पा जावे । यह सारासंसार और तीनों लोक भगमेंही वर्तमान है । जो तीनों लोकसे पार होजावे उसका नाम भक्त है, भक्त न भगका साथ करता है न भगमें आता है कितनी स्त्रियोंके साथ जो कोई सम्भोग करेगा अवश्य उसको उसके गर्भमें आकर जन्म लेना पड़ेगा ।

४५—प्रश्न—सत्य परमात्माका धर्म, यदि ईश्वर एक है तो सब मनुष्योंका धर्म भी एकही होना चाहिये ?

उत्तर—ईश्वर तो एक है पर मनुष्योंकी कामना भिन्न भिन्न है । जैसी जिसकी कामना होती है वैसेही धर्मोंमें उसकी प्रवृत्ति होती है उसीमें उसको प्रसन्नता होती है । जिसको जो धर्म अच्छा लगता है, वह उसके अतिरिक्त दूसरेको स्वीकार नहीं करता. क्यों कि, अपनी इच्छानुसार उसको वह धर्म मिला है । जो धर्म सब दूषणोंसे शुद्ध हो वह सत्य परमात्माका धर्म है ।

४६ प्रश्न—भक्ति बिना मुक्तिका दाता, ऐसा भी कोई गुरु है जो बिना भक्तिके मुक्ति देशके ?

उत्तर—यह सामर्थ्य केवल कबीर साहबमें है कि, बिना भक्तिकेभी अनन्त जीवोंको परम धामको पहुँचा दिया और अनेक भक्तोंको सपरिवार सत्य लोकको पहुँचा दिया ।

४७—प्रश्न—कबीर पंथसे मुक्ति, हिन्दू मुसलमान आदि सर्व धर्मवालोंको क्या एकही प्रकारकी मुक्ति मिलेगी ?

उत्तर—अपने २ कर्मानुसार सदा योग्य स्थान सब कोई पावेंगे पर मुक्ति तो तब होगी जब कबीरपंथमें सम्मिलित होंगे ।