भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1309, कुल 1367 में से

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पृष्ठ 1309

जो योरोपियन्स पृथ्वीको चलती बतलाते हैं उसके लिये प्रमाण और युक्ति लाते हैं वे ऐसे तुच्छ और तर्कखण्डित हैं कि, उनसे किसीके भी मनका समाधान नहीं हो सकता ।

यदि पृथ्वी चलती होती तो नावपर चढ़ेहुँके समान किनारेके सब पदार्थ दृष्टिसे छिपते हुयेके मान अन्तर्धान होते जाते पर ऐसा नहीं होता ध्रुव आदि तारागण नित्य एकही स्थानपर जैसेके तैसे जान पड़ते हैं यह कदापि सम्भव नहीं हो सकता कि, पृथ्वी तो चले और सदा सब समय ध्रुव आदि एक समान नहीं दिखाई दें ।

सर आइज़क न्यूटनने पृथ्वीकी दो गति बतलई है । १ वार्षिक २ दैनिक ।

वार्षिक गतिसे ऋतुओंका हेर फेर होता है और दैनिकसे दिन रात होता है । सो यदि ये दोनों चाल सत्य होती तो दोनों चालोंसे तारे और ग्रह दृष्टिसे अंतर हो जाते अथवा छोटे बड़े दीख पड़ते पर ऐसा न होकर उलटा ग्रह और तारे गण ज्योंके त्यों एक समान दीख पड़ते हैं पृथ्वी इससे भी अचलही सिद्ध होती है ।

ध्रुव तारेकी ओर दृष्टि डालनेसे भी पृथ्वी स्थिरही प्रमाणित होती है । क्योंकि, जब दक्षिणायन अथवा उत्तरायण होता है उस समय पृथ्वी बहुत दूरी पर चली जाती । ध्रुव बहुत छोटा दिखाई देता पर यह किसीने नहीं देखा बरन् सबको ध्रुव सदा एक समानही देख पड़ता है । इससे पृथ्वीकी दोनों गति अप्रमाणित नहीं होती ।

फिर न्यूटन साहबने चन्द्रमाको प्रकाश रहित बतलाया है । इसका कोई भी प्रबल प्रमाण उनके पास नहीं है । उन लोगोंका कथन है कि, सब ग्रहोंके साथ २ अनेक २ चन्द्रमा हैं वे सब प्रकाशित हैं पर यह हम लोगोंका चांद प्रकाशित नहीं, वाह इस हमारे चांदने क्या अपराध किया कि, ईश्वरने और चन्द्रमाओंको तो प्रकाशित बनाया इसको अन्धकार मय ।

देखो तौरीतमें पैदायशके प्रथम बाबके १३ से १९ आयत तक लिखा है कि ईश्वरने दो प्रकाश बनाये एक छोटा दूसरा बड़ा । बड़ेको सूर्य कहा, छोटा रात शासन करनेके लिये बनाया गया । जब कि, उनके ईश्वर कृत पुस्तकमें ऐसा लिखा है तो उनको चन्द्रमाको अन्धकारमय कहना ठीक नहीं है ।

कबीर साहब कहते हैं कि, चन्द्र और तारे दोनों विराट् पुरुषकी आंख हैं खूब प्रकाशमान हैं । दक्षिण नेत्र सूर्य और वामनेत्र चन्द्रमा हैं । जब सूर्य चन्द्रमा विराट्के नेत्र हैं तो दोनोंके प्रकाशित होनेमें कोई सन्देहही नहीं है ।

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