भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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कबीर साहबके चेलोंमेंसे नानक साहब और धर्मदास साहब इन दो चेलोंका बड़ा प्रभाव फँला । धर्मदास साहब सम्बत् १५१९ वि० में उत्पन्न हुए । नानक साहब १५२६ में हुए थे ।

कबीर साहब १५५० में जिन्दा भेषमें धर्मदास साहबको मथुरामें मिले उनका काम पूरा कर दिया नानक साहबको १५५३ में पंजाबमें मिले । उनका हृदय प्रकाशित कर दिया । पूरब उत्तरकी ओर धर्मदासजीको तथा पश्चिम भारतकी गुरुआई नानक शाहको प्रदान की ।

जिस प्रकार धर्मदास साहब, महम्मद साहब, नानक साहब, राजा बीरसिंह, राजा भूपाल, राजा अमरसिंह, दादुराम, गरीबदास साहब आदि महान् पुरुषोंको कबीर साहबने अपना देश दिखलाया उसी तरह दूसरे भी अनन्त जीवोंके हृदयको ज्ञानसे प्रकाशित करके मुक्त कर दिया जिसका कि वर्णन करना असम्भव है ।

अनन्त हंस तो लोक सिधार गये पर कोई २ हंस जिनसे कि दूसरे शरीरमें ले जानेका वचन हो चुका था वे ठोका पूरनेपर मुक्त होंगे ।

१२ प्रश्न — शरण हो भी गुरु विमुख होनेका कारण — जो लोग सतगुरुकी शरणमें आते हैं उनमेंसेभी कोई विमुख हो जाते हैं । उनका ऐसा होना बड़े आश्चर्यकी बात है ।

उत्तर — यह आश्चर्य बात नहीं कि, क्यों विमुख हो जाते हैं, बरन् यह आश्चर्यकी बात है कि, वे कालपुरुषकी भक्ति छोड़कर सत पुरुषकी भक्ति करने लग जाते हैं क्योंकि, कालपुरुषने सबकी बुद्धिको ऐसा बद्ध कर दिया है कि, उसमें कभी भी सत्य मार्गका विचार न होने पावे । कालपुरुषका ऐसा प्रताप है कि, जीव उसके जालसे निकलकर कभी सत्य पुरुषकी भक्तिकी ओर झुकही नहीं सकता । सतगुरुदयालुको धन्य है जिसकी कि कृपासे जीवोंका उद्धार होता है ।

कालपुरुष रूप मालीने संसार रूप बगीचा लगाया है, उसीका अखतिyar है, जब चाहे रखे जब चाहे नाश करदे । केवल सगुतरु कबीर साहबमेंही यह शक्ति है कि, जीवोंको कालके पाशसे छुड़ाकर भवसागरके पार ले जाय । कबीर साहब कहते हैं कि, कालपुरुषने सबकी बुद्धिको भ्रष्ट कर दिया है इसी कारण सत्य पदको नहीं पहचान सकते । सतगुरु सदा मार्ग बताता है पर जीव अंधा अज्ञानी समझता नहीं है । जब सत गुरुने सत्य युगमें पृथ्वीपर पदार्पण किया तब सबको उपदेश करने लगे । सुकृत ध्यानमें सत्य कबीरजीने कहा है —