कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1357, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंबहदत है तुझे और नहीं कोई है सानी ।
सब ओर भ्रम लावूत इस देर दुखानी ॥
गह खुशम गहें सब्ज गहे सुबक गिरानी ।
वे वर्ग सपर बाम चले बाद खिजानी ॥
पुर खार वह गुल्शन जहाँ गुलफाम न होवे ।
गल्तान सदहा विसमिले नखचीरमें देखे ।
मुरगां बकफस जेरके जंजीरमें देखे ॥
जर्ब जखम व कारी इसतीरमें देखे ।
तासीर अजब जालिमें रहगारमें देखे ॥
वह राह था मुझको जहाँ दाम न होवे ।
ऐ मेरे खिजर हाथ पकड़ आन हमारा ।
जुज्ज तेरे करम फ़ज़ल नहीं हमको सहारा ॥
है तेरी पनह आजिजे मिसकीं विचारा ।
दिन गुजर गया यों है न कुछ काम सिधारा ॥
रख अपना दिखा जल्दतर शाम न होवे ।
अब्र नसियां करम तेरे असर है कि नहीं ॥
सदफे बहर तेरे कोई गोहर है कि नहीं ॥
वागबां बागमें ऊल्फत का शजर है कि नहीं ॥
कोई नखले मुहब्बतमें समर है कि नहीं ॥
मन मिसकीं की तरफ तेरी नजर है कि नहीं ॥
ढूँढे मुल्क आदम और जिन्नो परी ॥
तुझ विन नहीं चैन सद आफात भरी ॥
शबे फुरकत न कटी हाय कटी उम्र मेरी ॥
वस्लकी रातकी हैहात न तू बात करी ॥
इस सबे हिज्जका आखिरको तो संहर है कि नहीं ॥
गौवास जो सद गोतः लगातेही मुआ ।
मुहरा हाथ लगा और न कुछ काम हुआ ॥
जब बहर करम लुफ़ तेरा मौजमें आया ।
बैठेही साहिल पर न सो न अम इनआम दिया ॥
दिल रियामें तेरे कोई लहर है कि नहीं ।