कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 259, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ें(कबीर साहब ! ) पृथ्वीपर जाओ कालपुरुष मनुष्योंको अत्यंत पीड़ा पहुँचा रहा है, उनको उसके हाथसे बचाओ ।
तब मुक्तामणि साहब पृथ्वीपर आये और मक्काः नगरमें उतरे, देखा तो मुहम्मद साहब मस्त हाथीपर सवार, बड़े प्रतापके साथ शासन कर रहे हैं । उस समय कबीर साहब बोले सलाम अलैक और मुहम्मद साहबने सलामका उत्तर देकर पूछा कि आप कौन हो और कहाँसे आये हो ? तब कबीर साहबने उत्तर दिया कि, मैं सत्यपुरुषकी आज्ञा लेकर आया हूँ, आपसे पूछना चाहता हूँ कि, आप किसकी आज्ञासे ऐसी हिंसा करते हो । तब मुहम्मद साहबने कहा कि हमको लाहूतसे आज्ञा मिली है । तब कबीर साहबने कहा कि, लाहूत स्थान तो बार है, पारकी सुधि आपको नहीं । वह परमेश्वर जो समस्त संसारका स्वामी है उसकी यह आज्ञा नहीं है और व्यर्थके रक्तपातसे वह कदापि प्रसन्न नहीं होता, लाहूत मध्यका स्थान है वह संसारका यथार्थ कर्ता नहीं है । तब मुहम्मद साहबने कहा कि, इसका निश्चय मुझे तब हो जब मैं वह सत्यलोक स्वच्छुसे देखूँ । इस बात पर कबीर साहबने मुहम्मद साहबको सत्यपुरुषका दर्शन कराया और फिर मक्काको ले आये और रक्तपात तथा मारकाट बंद कराया तथा मुहम्मद साहबको शिक्षा दिया ।
ग्यारहवाँ प्रकरण ।
मुहम्मद साहबके मेआराजके विषयमें मतभेद ।
मुहम्मद साहबके मेआराजके बारेमें मुसलमान अनेक अनुमान करते हैं । जैसा कि, हदीसों तथा तारीख मुहम्मदीमें लिखा है कि, मुहम्मद साहबके नबी होनेके बारहवें वर्षमें यह घटना हुई कि, जिबराईल तथा मेकाइल रात्रिके समय रसूलल्लाहके निकट आये और उनका हृदय फाड़कर प्रत्येक प्रकारके पाप-युक्त दूषित रक्तसे हृदयको विशुद्ध किया और बुराक़ घोड़ा लाकर उसपर इन्हें सवार कराया जिबराईलने रिकाब पकडी और मेकाईलने बाग थामी । पहले बडे़ हैकल अर्थात् बंत अकसाके द्वारपर पहुँचे, बहुतसे फरिश्ते इस स्थानपर उनको सलाम करनेके निमित्त आये, हजरत घोड़ेको बांधकर आप हैकलके भीतर गये और वहाँ आपने समस्त पैगम्बरोंकी आत्माओंको देखा और उनसे वार्तालाप किया. फिर एक सोपान आकाशसे उतरी जिसको अरबी भाषामें मेआराज बोलते हैं वह सीढी पृथ्वीसे अकाशपर्यन्त रक्खी गई और मुहम्मद साहब बुराक़ पर सवार होकर मेआराज सीढी पर चढ़े और उसके डंडोंपर चढ़ते हुए आकाशको चले । जब पहले आकाशपर पहुँचे तब जिबराईलने पहले आकाशका द्वार खटखटाया