कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 306, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंकबीर साहबको अपने बराबर बिठालिया ॥ यह कौतुक देखकर वैरियोंके दाँत खट्टे हो गए, जिह्वा बंद हो गई । उस समय ब्राह्मण और काजी जो कबीर साहबसे द्वेष रखते थे बादशाहसे फरियाद करने लगे कि, यह कबीर बड़ा काफिर है । हिन्दू तथा मुसलमान दोनों दीनोंके विरुद्ध है, अपनेको परमेश्वर कहता है । प्रत्यक्षमें पुकारता फिरता है कि, मैं समस्त संसारका रचयिता हूँ सदैव कुफ़्ही बकता रहता है । ये बातें सुनकर बादशाहने पूछा कि, ऐ कबीर ! क्या यह बात सत्य है कि, आप अपनेको परमेश्वर कहते हो ? देखो गरीबदासजीकी वाणीमें (कबीरचरित्र बोध पृ.३३)
गरीबदास वचन ।
शाह सिकन्दर बोलता, कह कबीर तू कौन ।
गरीबदास गुज़रै नहीं, कैसे बैठा मौन ॥
उत्तर कबीर साहबका ।
हम ही अलख अल्लाह हैं, कुतुब गौस गुरु पीर ।
गरीबदास मालिक धनी, हमरो नाम कबीर ॥
मैं कबीर सर्वज्ञ हूँ, सकल हमारी जात ।
गरीबदास पिंडदानमें, युगन युगन सँग साथ ॥
शाह सिकंदर देखकर, बहुत भए मिसकीन ।
गरीबदास गति शेरकी, थरकीं दोनों दीन ॥
जब कबीर साहबने प्रत्यक्षमें इस बातको कहा एवं सर्व साधारणके सामने शाही इजलासमें अपनेको परमेश्वर होनेका दावा किया । खुल्लेमखुल्ला कहा कि, मैं समस्त सृष्टिका रचयिता हूँ । तब बादशाहने एक गाय मँगवाई और अपने सामने हलाल करवाकर कबीर साहबसे कहा कि, यदि आप परमेश्वर हों तो इस गायको जिला दीजिये ।
गरीबदास वचन ।
गऊ पकड़ बिसमिल करे, दरगह खंड वजूद ।
गरीबदास उस गऊका, पिए जोलाहा दूध ॥
चुटकी तारी थाप दे, गऊ जिलाई वेग ।
गरीबदास दूहन लगे, दूध भरी है देग ॥
शाहने गायको हलाल करवा कबीर साहबसे कहा कि, इसे जीवित करिये तब कबीर साहबने उस गायके थापी दी तथा चुटकी मारी—उसी समय वह गाय उठ खड़ी हुई । उसका सब घाव तथा दर्द मिट गया । उसके स्तन दूधसे भर