भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 305

देखकर स्वामीजीकी इच्छा हुई कि, जानना चाहिए यह कबीर कौन है जो ऐसे २ कौतुक किया करता है इस कारण स्वामीजीने ठाकुरका ध्यान किया तब ध्यानमें दिखाई दिया कि, 'ठाकुरके सिंहासनपर जो ठाकुर की मूर्ति है उसके शिरके ऊपर कबीर साहबका सिंहासन रक्खा हुवा है । जब कबीर साहबकी ऐसी बड़ाई और इतना प्रताप दृष्टिगोचर हुवा तबसे स्वामीजी कबीर साहबकी बड़ी मर्यादा करने लगे अनेक बार स्वामीजी कबीर साहबकी प्रशंसा किया करते थे । रामानन्द तो कबीर साहबकी प्रशंसा किया करते और कबीरसाहब अपने गुरुके गुण गाया करते थे ।

उस समय गोरखनाथ योगी जो बड़ाही बलिष्ठ सिद्ध था वह प्रायः रामानन्द स्वामीसे आकर वाद विवाद किया करता था, एकबार उसका सामना कबीर साहबसे हुआ । कबीर साहबका गोरखनाथके साथ बड़ाही वाद विवाद हुआ । दोनोंही ओरसे अनेक कौतुक दिखलाई दिए । जो लोगोमें प्रसिद्ध हैं । अन्तमें गोरखनाथ परास्त हुआ । और अपनी सेली और टोपी कबीर साहबके चरणोंपर चढ़ा दंडवत् प्रणाम करके एक ओरको चलता बना ।

अध्याय ॥ ४ ॥

सिकन्दर लोदी बादशाहका काशीमें आना कबीर साहबका वहाँ बुलाया जाना उनके दर्शनसे बादशाहके शरीरकी जलन दूर होना सुलतानका उनपर विश्वास लाना—

सम्बत् १५४५ विक्रमीमें बहलूलका पुत्र सिकंदर लोदी काशी नगरमें पहुँचा, बादशाहके शरीरमें जलनका रोग था । वह भी ऐसा कि, उससे उसका शरीर रात दिन जला करता था । उस रोगसे उसे तनिक भी चैन नहीं मिलता था । तब लोगोसे उसने पूछा कि, इस नगरमें कोई ऐसा भी है जो मुझे इस रोगसे मुक्त कर सके ? तब वे लोग जो कबीर साहबसे द्रष्ट रखते थे बोले कि, यहाँ कबीर नामक एक फकीर है । यदि वह आवे तो श्रीमान् आरोग्य हो सकते हैं (ऐसा कहनेका उनका तात्पर्य यह था, इस बहानेसे कबीरको बादशाहके सामने बुलवाकर मरवा डालें, जब लोगोंने बादशाहसे ऐसा कहा तब बादशाह ने आज्ञादी कि, तुरन्त कबीर साहबको बुला लाओ विलम्ब होने न पावे । शाही आज्ञा पातेही भूत्यगण दौड़े और कबीर साहबसे आकर कहा कि, आपको बादशाह बुलाते हैं शीघ्र चलो । कबीर साहब बादशाहके सामने आए । बादशाह आपका दर्शन पातेही उसी समय रोगमुक्त होगया । शरीर ठंडा हो गया, बड़ा सुख पाया । तब बादशाह सिंहासनसे उठ खड़ा हुवा । बड़ी प्रतिष्ठाके साथ