कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 307, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंगये । उसके दुग्धसे बरतन भर गए । उस दुग्धको पान करके लोग अत्यंत हर्षित हुए । शाह सिकंदर तथा उसके सभासदगण इस कौतुकको देखकर अत्यंत आश्चर्यान्वित हुए । बादशाहको विशेष विश्वास हुआ ।
शेखतकीका क्रोध ।
जब शाह सिकन्दरके पीर शेखतकीने देखा कि, अब तो शाह सिकन्दरने कबीर साहब पर बहुत विश्वास किया है और उनकी अत्यंत प्रतिष्ठा तथा मर्यादा करता है तब वह जल मरा । कारण यह कि, वह बड़ाही द्वेषी तथा ईर्षा करनेवाला था । उसने बादशाहसे कहा कि, ऐ सिकंदर ! आपने जोलाहेसे प्रेम तथा मुझसे अलगाव किया है । तब बादशाहने कहा कि, ऐ गुरुजी ! आप तो मेरे पीर हो वह एक दरवेश (साधु) है । आपने आज्ञा दी थी कि, गुरु तथा फकीर स्वयम् परमेश्वर हैं । आप और कबीर एकही हैं । मैं जलनकी बीमारीसे मर रहा था मेरे जाते हुए प्राण उसने रख लिए—मैंने उसके प्रसादसे घातक रोगसे आरोग्य लाभ किया है ।
लोगोंका शेखतकीके पास आना ।
जब बादशाहने ऐसा कहा तब शेखतकी चुपचाप अपने डेरेंको चले गए । शेखजी अपने डेरेंमें बैठे थे वे लोग जो कबीर साहबसे शत्रुता रखते थे शेखजीके पास आकर इकट्ठे हुए । ब्राह्मण तथा मुल्ला सब मिलकर कहने लगे कि, यह कबीर बड़ा काफिर है । हिन्दू तथा मुसलमान दोनोंकी निन्दा करता है । हम लोग गुरु तथा देवताके नामपर जो बलिप्रदान करते हैं अथवा कुरबानीके नामपर गऊ बकरी और मुरगा चढ़ाते हैं । इस कारण यह हम लोगोंको कसाई कहता है । इस कबीरको समस्त काशीवासी मानते हैं । हमारी कोई बात नहीं पूछता यदि यह जोलाहा किसी प्रकार मारा जाय तो हमारी छतियोंपरका भारी बोझा टल जावे । जब शेखतकीने ब्राह्मणों तथा मुसलमानोंसे ऐसा सुना तब अत्यंत प्रसन्न हो कहने लगे कि, जोलाहेसे और मुझसे तो पहलेहीसे वैर हो रहा है । अब तुमलोग इस बातपर उद्यत हो तो मैं अब निश्चय कबीर साहबका वध करूंगा कदापि जीवित न छोड़ूंगा । मेरा नाम शेखतकी है । मैं बादशाह सिकंदरका पीर हूँ । देखूँ तो वह मेरे हाथसे किस प्रकार बचता है, कैसा फक्कड़ कबीर है । मैं चाहूँ तो उसको नदीमें डुबवाऊँ—चाहूँ तो अग्निये दहन करदूँ—चाहूँ तो दीवारमें चून दूँ—चाहूँ तो टुकड़े २ काटकर कौमा करूँ—यदि चाहूँ तो बठुवेमें चुरा डालूँ । यदि चाहूँ तो तोपके सामने रखकर उड़ाऊँ । चाहूँ तो कुएँमें बंद कर दूँ और चाहूँ तो हाथीसे चखा डालूँ ।