कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 316, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंनितान्तही अनभिज्ञ तथा अज्ञ है, केवल चार मुक्तियोंको सत्य मानते हैं जो वस्तुतः वास्तविक हैं। निम्नलिखित विवरणको देखो —
सत्य लोक।
<!-- image: A hand-drawn circle, possibly representing a celestial body or a conceptual element. -->यह सत्यलोक सत्यपुरुष का स्थान है और : जाह्नव आहूतसे असंख्य लाख योजना ऊपर
इसको अमरधाम कहते हैं और यहाँहीसे कवीर : है—और दश असंख्य लाख योजना खल अर्थात्
साहव सत्य पुरुषका समाचार लेकर पृथ्वी पर : सून्य है।
आया करते हैं और इसी जगदीश्वरकी आज्ञा :
समस्त संसारपर चलती है और सब इसहीके : आहूत राहूतसे दो असंख्य योजना ऊपर है।
अधीन हैं। : राहूत साहूतसे चार असंख्य योजना शून्यके ऊपर है।
सहजद्दीप सहजपुरुषका स्थान है। : साहूत बाहूतसे पाँच असंख्य शून्यके ऊपर है।
अंकुरद्दीप अंकुरपुरुषका स्थान है। : बाहूत हाहूतसे तीन असंख्य योजना ऊपर है।
दृच्छाद्दीप दृच्छापुरुषका स्थान है। : यह हाहूत स्थान लाहूतसे एक असंख्य योजना ऊ०
सोहजद्दीप साहप पुरुषका स्थान है। : यह लाहूतमलकूतसे ग्यारह पालंग योजना ऊपर है
अचिन्त्यद्दीप अचिन्त्यपुरुषका स्थान है। : यह जवरुत स्थान मलकूत से अठारह करोड
अरण्यद्दीप अक्षरस्थान सायुज्य मुक्ति। : योजना ऊ०
आंझरीद्दीप सारुप्यमुक्ति निरञ्जन स्थान यह :
बैकुंठ विष्णुका स्थान सामीप्यमुक्ति। :
दसु अंशका स्थान सालोक्यमुक्ति। :
पृथ्वी और नासूत स्थानके मध्य यह। :
देवताओं की पुरियों और सिद्धोंके स्थान है।
पृथ्वी • भलाई बुराई का स्थान।
यह सात नरक हैं।
{ : इन सात नरकों में चौरासी कुण्ड हैं
: और पापियोंके दंड पानेका स्थल है।
कुछ भी नहीं है। त्रियातीतकी श्रेणी जिसको वेद सबसे बढ़कर बतलाता है, इस श्रेणीमें अलख निरञ्जन अधिकृत है—जितने साधुगण उस श्रेणीको हस्तगत कर लेते हैं—वे सब उसके समान होजाते हैं—सब सृष्टिकी रचना करनेका सामर्थ्य रखते हैं—वे सबके देय उसी विद्यासे प्रकाशित है—समस्त सिद्धियाँ उनके वशमें