कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 322, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंजो परमोद गुरु चौथे बाला हैं पीर । सो शाफी बवाजी जे खतरःखतीर ॥
कमल नाम साहब कहूँ पाँचवाँ । जगतके गुरु पीर सो बेगुमाँ ॥
हैं छटएँ खुदाबन्द नामे अमोल । कि जिस खौफसे भागजा यमकेगोल ॥
जो सूरत सनेही साहब सातवाँ । कि जङ्गी मेहर देखिए आतमाँ ॥
जो पैदा हुए आठवें नाम इक । मलिक मौत काहो गया सीनःशक ॥
नवै पाक साहब हुए नाम पाक । भरम भूतको सो मिलाया है खाक ॥
प्रगट नाम साहब प्रगट हैं दहम । कि सामान मुक्ति किया सो बहम ॥
धीरजनाम साहब इग्यारवें जो आए । कि धीरज निगह जीव धीरज हुए ॥
उगार नाम साहब हुए बारहवें । परम पंथ परचार इस अह्द में ॥
तेरहवीं उदय पहने आदम कबा । तो जमशेर गुरां भगा दुम दवा ॥
हुई तेरहवीं कुरसी आली दिमाग । किदरजा हरे हागए खुशकबाग ॥
हुवा जोर ओ शोर सत नामको । सला है करम^११^ खास ओ आमको ॥
मिलीं बारहों पंथ इस अह्दमें । सतायश करें गुरुकी यक मह्दमें ॥
कु^१२^रु नाम साहब कहे चौदहवाँ । कि जिनकी बुजुर्गी बदरहो जहाँ ॥
जो परका^१३^श परकाश हो रहीं । सना इस्दअस्त नाम दरजा कहीं ॥
उदि^१४^स्त सोलहवीं साथ जोशन हुए । तो जम जङ्गमें नाम रोशन हुए ॥
कि जब सत्रहवीं होवें साहब मुकु^१५^न्द । हुए कालके दाँत इस वक्त कुन्द ॥
अरध^१६^ नाम अट्टारवीं दर्दमंद । कि आवागमनकी किया राह बंद ॥
जो उन्नीसवीं नाम शानी गुरु । करें जीव को पुर्षके खबरू ॥
कहो बीसवीं साहब हंस मन । न जिनसे लगे काल का कोई फन ॥
सु^१७^कृति नाम साहब हुए बीस एक । तो सुकीरतकी जगमें रहे खूब ठीक ॥
अरज^१८^ नाम बाईस जाहिर हुए । तो इनसाँ परमपदके माहिर हुए ॥
हैं रस^१९^ नाम साहब जरस बीसती । सुन आवाज ताबे हुई सब जमीन ॥
हों चौबिसवीं गङ्गा^२०^ मुनि साहब । गुनहसे हों सब आदमी तायब ॥
पुरुष^२१^ नाम साहब दरस बीस पाँच । नजिउको लगे सङ्गेसो जाकी प्राँच ॥
छबीसबी जागृत^२२^ नाम साहब जगे । न इनसाँको रहजनव ठग तब ठगे ॥
हुए भृगु^२३^ मुनि साहब सात बीस । रहे रास्त दुश्मन दिया जिसने दास ॥
अस्त^२४^ नाम साहब कहे बीस आठ । कि यमदूतको जो दिया मार काठ ॥
हैं उन्तीसवीं साहब कंठ^२५^ मुन । किया कालको मारकर सो दफन ॥
हैं सन्तोष^२६^ मुनि साहब तीसवें । पयान पुरुष आवे ईस अह्दमें ॥