कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 343, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंआपकी बातें मिथ्या कैसे हों ? कबीर साहबने कहा कि, ए रामदास ! मेरे कथनानुसार विष्णु तुम्हारे घर गए । परन्तु तुमने अच्छी विष्णुपूजा की । सोटे मारकर भगा दिया । यह बात सुनकर वह ब्राह्मण लज्जित तथा दुःखी हुआ । क्योंकि विष्णुभक्त था । जान लिया कि, विष्णु भैंसाके स्वरूपमें थे । वह भक्त तो था, परन्तु भक्तोंकैसे गुण उसमें नहीं थे कि, अपने प्रेमीको प्रत्येक वस्तुमें देखे इस कारण विष्णुदर्शनसे वञ्चित रहा ।
कमालको कबीर साहबने मुरदासे जीवित किया उसीका (बोधसागर-मेंका यह दोहा है —
दोहा—मुरदासों जिन्दा किया, दिलसों दीन मलाल ।
शाह परतीत दिखाइयाँ, उत्पन दास कमाल ॥
तब शेखतकीने कहा कि, मैं इस लीलाको नहीं मानता । कारण यह कि, यह लडका अचेत था । इस कारण जीवित हो गया । मेरी बेटी आठ दिवसोंसे कन्नमें मरी पड़ी है । जब आप उसको जीवित करें तब मुझे विश्वास हो । कबीर साहब सिकन्दर शाह और शेखतकीके साथ उस लडकीकी कन्नपर गए । कबीर साहबने पुकारा । उठ शेखतकीकी बेटी ! वह नहीं उठी । फिर कहा कि, उठ शेखतकीकी बेटी ! फिरभी वह न उठी तब तीसरी बार कबीर साहबने कहा उठ कबीरकी बेटी ! उस समय वह लडकी जीवित होकर कन्नसे निकल पड़ी । शेखतकी उसके जीवित होनेपर उसका हाथ पकडकर अपने घर ले चले । उस लडकीने कहा कि, मैं तुम्हारे नामसे जीवत नहीं हुई हूँ । बरन् कबीर साहबके नामसे उठी हूँ । मैं कबीर साहबकी बेटी हूँ । मैं इनके साथ रहा करूँगी । तुम्हारे गृहपर न जाऊँगी । वह लडकी कबीर साहबकी बेटी विख्यात हुई ; और उसका हृदय सत्यगुरुकी कृपासे प्रकाशित हो गया ।
कबीर कसोटीमें लिखा है कि बादशाहने तेरह गाडी कोरी पुस्तकोंकी
१ कबीर कसोटीमें लिखा हुआ है कि, किसीके यहाँ एक लडकी मर गई थी, लडकीके वापसे कबीरजीने उस मृत बालिकाको माँगा । पर उसने न दी । जब उसकी पत्नीको यह समाचार मिला तो उसने उसको कबीरजीके पास भेज दिया । कबीरजीने उसे जिन्दा करके कमाली नाम रखा कमालबोधमें लिखा हुआ है कि, "शेखतकी हरसे मनमाई, लाय कमाली भेट चढाई" यह लिखा मिलता है । इससे यह प्रतीत होता है कि, कबीर साहबके पास पुत्रीके रूपमें रहनेवाली एक कमाली ही है । कबीरकसोटी पृ. ३० में शेखतकीने बादशाहसे कहा है कि, यहाँसे जगन्नाथकी आग बुझाना क्या है, उसने अभी लडका और एक लडकीको जिन्दा किया है । इन बातोंके देखनेसे यह अवश्य ज्ञान होता है कि विज्ञ पाठक इस प्रकरणको सर्वत्र विचार करके पढ़ें, कमाली पुत्री थी वा नहीं यह प्रश्न इतिहासके गर्भमें अन्तर्हित है । कमालीकी दिव्य वाणीही इस बातको बता रही है, कि, उसके हृदयमें पूर्ण प्रकाश हो चुका था ।