भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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उसके नीचे चोर दबके मर गया, इस कारण तुम फाँसी पाओगे तब मजदूरोंने कहा महाराज ! हमारा कोई दोष नहीं, काजीकी बेटी अच्छे अच्छे वस्त्र आभूषण पहनकर अटारीपर चढ़ गई उसके देखनेको हमारा मन दौड़ गया गारेकी ओर ध्यान नहीं रहा, इस कारण हमारा कोई दोष नहीं, दोष काजीकी लड़कीका है। तब राजाने काजीकी लड़कीको बुलाकर कहा कि, तू भली भाँति वस्त्र तथा आभूषण पहनकर अटारीपर चढ़ी तेरे देखनेके निमित्त मजदूरोंका हृदय ललचाया उन्होंने कच्चा गारा बना दिया, महाजनकी कच्ची दीवार हो गई, उसके नीचे चोर दबकर मर गया, इस कारण अब तू फाँसी पावेगी। तब काजीकी बेटीने कहा कि, महाराज ? मेरा कुछ दोष नहीं कारण यह कि, एक बादशाह ससैन्य इस पथसे जाता था, उसके देखनेहीके निमित्त मैं अटारीपर चढ़ी थी सो इस बादशाहका दोष है। तब राजाने आज्ञादी कि, जाओ बादशाहको पकड़ो, उस पर बादशाह की फौज दौड़ी, इधर उधर दूँढा, न बादशाह और न उसकी सैन्यको पकड़ सके, वह बलिष्ठ बादशाह राजाके पकड़नेसे न पकड़ा गया वह डंका देता हुवा अंधेरे नगरसे बाहर निकल गया, राजाका कुछ वश नहीं चला तब राजाने देखा कि, मेरा न्याय तो पूरा नहीं हुवा इस कारण बड़े दुःखमें बैठ था। इतनेमें राजाका मंत्री वहां आन उपस्थित हुआ। पूछा कि, महाराज ! आपके दुःखका क्या कारण है ? तब राजाने कहा कि, मैं चाहता था कि, बादशाहको गिरफ्तार करूं पर वह मेरे वशमें नहीं आया, न मेरा न्यायही पूरा हुआ यह महादुःख मेरे हृदयको बेधे डालता है। यह बात सुनकर मंत्रीने उत्तर दिया कि, आप दुःखी न हों हमारे अंधेरे नगरमें दो सण्ड मुसण्ड साधू फिरते हैं उनको आप फाँसीपर चढ़ावें, कारण यह कि, बादशाह तथा साधुओंकी मयदि समान होती है इस प्रकार आपका न्याय पूरा हो जावेगा। यह बात सुनकर वह अंधेरी राजा प्रसन्न हुवा, विवेक तथा विचार नामक दोनों साधुओंको पकड़ लिया। आज्ञा दी कि, इन दोनों साधुओं को फाँसीपर लटका दो। तब उन दोनों साधुओंने यह युक्ति की कि, आपसमें लड़ने झगड़ने लगे। एक कहता कि, मैं फाँसी चढ़ूँ, दूसरा कहता कि, मैं पहले चढ़ूँ। दोनोंको झगड़ते देखकर राजाने पूछा कि, तुम दोनों क्यों झगड़ते हो। तब उन्होंने उत्तर दिया कि, महाराज ! इसका कारण यह है कि, हम लोग बड़े ज्योतिषी हैं, लग्न तथा मुहूर्तसे भली भाँति विज्ञ हैं, भविष्यकी बातोंको जान लेते हैं और हमें यह जान पड़ा है कि, इस समय चार लग्न ऐसे हैं कि, इन लगनोंमें जो फाँसी चढ़ेगा सो सर्वोच्च भंगीपर अधिकृत होगा। जो पहले फाँसी चढ़ेगा वह