भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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सिखला रक्खा था कि, अब मूच्छु भूत बनकर फिरा करता है । यदि वह आपके समीप आवे तो उसको कदापि आने न देना एकदं उसको देखकर भागना । कारण यह कि, जो कोई उसके समीप जाता है उससे वह चिपट जाता है । यह बात राजाके मनमें भली प्रकार बैठ गई । एक दिवस राजा आखेट करनेके निमिख बनको गये । मूच्छु एक पेड़के नीचे बैठकर भगवद्भजनमें लीन था । जब राजा बनमें गया तब मूच्छु मंत्रीको बूझके नीचे देख जान लिया कि, यह वही मेरा मंत्री है जो प्रेत हुआ है । ऐसा न हो कि, यह भूत मुझसे चिपट जावे । राजा तुरंतही अपना घोड़ा दौड़ाकर भाग गया । उस नरपशुको तनिक भी सुध नहीं हुई कि, इस चकमेको तो जान जाय ।

दूसरा दृष्टान्त ।

एक राजाने अपने नौकरोंको घाटपर भेजा कि, धोबीसे वस्त्र धोनेको सहेजदें । भूत्य जब घाटपर धोबीके पास गया तो देखा कि, धोबी सूढर सूढर कर रो रहा है । इस धोबीको रोता देखकर राजाके भूत्यने पूछा कि, तू क्यों रोता है ? उसने उत्तर दिया कि, सूढर मर गया । यह बात सुनकर राजाका भूत्य भी सूढर सूढर कहकर रोता हुआ राजाके पास लौट गया । राजाने पूछा तू क्यों रोता है ? उसने उत्तर दिया कि, सूढर मर गए । उसे रोता देखकर राजा भी सूढर सूढरकर रोने लगा । राजाके रोते हुए, राजाके महलकी समस्त रानियाँ और समस्त नगर सूढर सूढर कहकर रोने और पछाड़ खाने लगे । कुछ कालोंके पीछे राजाका मंत्री आया । राजाको रोते तथा समस्त नगरको शोकाकुल देखकर उसने पूछा कि, ए महाराज ! आपके विलापका क्या कारण है और समस्त नगरमें ऐसा शोक क्यों फैला हुआ है ? तब राजाने कहा कि, सूढर मर गए । तब मंत्रीने पूछा कि, सूढर कौन था ? तब राजाने कहा कि, मैं तो नहीं जानता । अपने भूत्यको रोता देखकर मैं भी क्रंदन करने लगा था । मंत्रीने उस भूत्यको बुलाकर पूछा कि, सूढर कौन था जिसके निमित्त तू रोता था । भूत्यने उत्तर दिया कि, मैं कुछ नहीं जानता पर धोबी सूढर सूढर करके रोता था । उसको देखकर मैं भी रोने लगा तब मंत्रीने उस धोबीको बुलाया और पूछा कि, तू बतला कि, सूढर कौन था जिसके निमित्त तू रोता था ? तब धोबीने उत्तर दिया कि, मेरे पास एक गदहेका बच्चा था उसका नाम मैंने सूढर रख दिया था उसको मैं बहुत चाहता था वह आज घाटपर मर गया उसके दुःखसे मैं रो रहा हूँ ।

गुरुपशु ।

गुरुपशु वह है कि, जो बिना ज्ञांचे शिष्य किया करता है । जो शिष्य

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