भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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समझदार होता है पहले भलीभाँति समझबूझ लेता है तब गुरु करता है। चार बातोंकी जाँच करलेना चाहिए। अर्थात् गुरु, शास्त्र, आचार्य, ईश्वर, ये चारों बातें जब भली भाँति जानी, जाय तब गुरु करना उचित है। प्रथम गुरु, सर्वतोभावसे योग्य हो। द्वितीय शास्त्र निर्दोष तथा निष्कलङ्की हो। तीसरे धर्मका अग्रगण्य सब प्रकारसे योग्य तथा निर्दोष हो। चौथे यह जानना चाहिये कि, वह गुरु किस ईश्वरकी भक्तिमें लगाता है। जिस ईश्वर अथवा देवताकी प्रार्थना बतलाता है वह देवता कैसे गुण तथा क्या बल रखता है ? हमें वह छुटकारा देसकता है वा नहीं ? यदि वह सर्वतोभावसे योग्य तथा सामर्थ्यवान् है तो उसका पूजन उचित है क्योंकि मनुष्य अंधे गुरुसे मुक्ति नहीं पा सकता है।

साखी - कबीर - जाको गुरु है अंधरा, चेला खरा निरंध ।

अंध अंधको ठेलिया, परे कालके फंद ॥

चौपाई - गुरु गुरु कहत सकल संसारा । गुरु सोई जिन तत्त्व विचारा ॥

प्रथम गुरु हैं पिता व माता । रज वीरजके सोई दाता ॥

दूसर गुरु है मनकी दाई । ग्रीहवासकी वंद छोड़ाई ॥

तीसर गुरु जो धरियानामा । लै लै नाम पुकारै गाभा ॥

चौथे गुरु जिन दीक्षा दीना । जगव्यवहार रहत सब चीना ॥

पँचवें गुरु जन वैष्णव कीना । रामनामको सुमिरन दीना ॥

छठवें गुरु जिन भ्रमगढ़ तोड़ा । दुविधा मेट एकसे जोड़ा ॥

सातवा गुरु सत शब्द लिखाया । जहाँका ततले तहां समाया ॥

साखी - कबीर - सात गुरु संसारमें, सेवक सब संसार ।

सतगुरु सोई जानिए, भवजल उतारे पार ॥

कबीर कान-फूँका गुरु, हृदका बेहृदका गुरु और ।

बेहृदका गुरु जब मिले, तो लहे ठिकाना ठौर ॥

अर्थ-कबीर साहिब कहते हैं कि, जिसका गुरु अन्धा है उसका चेला उससे भी अधिक आंधरा होगा, अन्धागुरु चेलाको अन्धकारकी ओर ही ठेलता है इस तरह दोनों ही नरकके फन्देमें फस गये। कालने उन्हें कवलित कर लिया सारा संसार गुरुगुरु कहता है, पर वही गुरु है जो तत्त्वका बिचार रखता है। सबसे पहिले तो मा और बाप गुरु हैं क्योंकि, वे ही अपने रज वीर्यसे शरीरको उत्पन्न करते हैं। दूसरी गुरु सुखपूर्वक जतन करानेवाली दाई है जिसने गर्भवासकी कैंद छुटादी। नाम करण करने वाले तीसरे गुरु हैं क्योंकि, सब लोग उन्हींके रखे नाम से बोलते हैं। यज्ञोपवीत कराने वाले तथा पढ़ाने लिखाने और व्यव-