भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 597

हेतु अनेक शिक्षायें दीं । परन्तु शाहंशाह कुछ दिनोंतक शिक्षाका याद रखके फिर भूल गया । एक दिवस शिकार खेलने गया । शिकारमें एक कबूतर पर अपना बाज छोड़ा । उस बाजने कबूतरको पकड़कर तोड़ डाला । लोग बड़ी प्रशंसा करन लगे कि, बाजने कौसी फुरतीसे कबूतरको पकड़कर तोड़ डाला । इनकी बातें सुनकर बादशाह अत्यंत हर्षित हुआ । इतनेमें फिर कबीर साहब बादशाहके सामने आये । समझाया कि, हे बादशाह ! इसी प्रकार तुमको एक दिवस यमराज पकड़कर तोड़ डालेगा, जैसे कि, बाजने कबूतरको तोड़ा है । सावधान ! यमसे तुम्हारा बल नहीं चलेगा । सैन्य और भंडारा आदि काम नहीं आवेंगे । इतना कहकर कबीर साहब अन्तर्धान हो गये । बादशाहके मनमें परमेश्वरका भय उत्पन्न हुआ और सत्यगुरुकी शिक्षा हृदयमें बैठ गई । फिर एक दिवस जब कि बादशाह बड़ेही सुख सम्भोगमें अचेत सो रहा था तब आकाशसे आवाजें आने लगीं । उस आकाश बानीने बादशाहको उपदेश दिया कि, “ऐ बादशाह ! तू सचेत हो, क्यों अचेत हो रहा है ?” तब बादशाह आश्चर्यनिवृत्त होकर इधर उधर देखने लगा कि, कौन मुझे शिक्षा देता है ? चारों ओर देखा पर कोई स्वरूप कहीं दिखाई नहीं दिया । तब निस्तब्ध होकर बैठ रहा ।

एक दिवस बादशाह अपने महलमें बैठा था कि, एक मनुष्यको अपनी छतपर फिरते पाया । उससे पूछा, तू कौन है ? मेरी छतपर क्यों फिरता है ? उसने उत्तर दिया कि, मैं $\times$ बूलूच हूँ मेरा ऊँट खोया गया है, दूँदता फिरता हूँ । तब बादशाहने कहा क्या छतपर ऊँट चढ़ सकता है ? तू कैसा बुद्धिहीन है ? तब बूलूचने उत्तर दिया कि, मैं तो मूर्ख नहीं वरन् ऐ बादशाह ! तू बिना बुद्धिका है । कारण यह कि, ऊँटका छतपर फिरना तो सरल है पर यह कठिन है कि, तू जो आशा रखता है कि, मैं बादशाही करता हुआ वैकुण्ठको जाऊँगा यह तो महामूर्खताका काम है । इतना कहकर वह बूलूच तो अन्तर्धान हो गया । बादशाहके मनमें अन्तदिवसकी गम्भीर चिन्ता उत्पन्न हुई । फिर भी बादशाहको अचेत देखकर एक दिवस कबीर साहबने एक कुत्तेको उत्तेजित किया । वह दौड़कर बादशाहके सन्मुख आया । उसके समस्त शरीरमें घाव थे, जिसमें कि, बहुतसे कीड़े पड़े हुए थे, जो कि, उसके मांसको खाते थे जिससे वह अत्यन्त व्यथित और व्यग्र हो रहा था । जब वह बादशाहकी ओर दौड़कर चला । तब बादशाहकी लौडियोंने बहुत रोका और हटाने लगीं, तथापि उस कुत्तेने एक भी न माना, सुलतानके सामने जा खड़ा हुआ । मनुष्यकी भाषामें यों कहने लगा कि,


$\times$ बूलोचिस्थान देशके रहनेवालेको “बूलूच” कहते हैं ।