भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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दे जमीनो जमात आम तुम्हें । ऐ अमलहाय सद सलाम तुम्हें ॥
तूही जेरीन् दरमयों बाला । मनका मनका तुही माला ॥
तूही पैदा किया तुही पाला । तूही सबजा हुआ तूही जाला ॥
कौन पहचान अकल खाम तुम्हें । अमलहाय सद सलाम तुम्हें ॥
इन्द्र ब्रह्मा व विष्णु भी भूले । अपने अमलोंके झोंकमें झूले ॥
कहीं पजमुरदा और कही फूले । हिसँ हैवों घर बघर डोले ॥
देरहीमो करीम नाम तुम्हें । ऐ अमल हाय सद सलाम तुम्हें ॥
आशकोंको दिखाया राहे सवाब । फासिकों के लिये शहीद अजाब ॥
सारा आलम बना खयालो खाब । कोई न देरीना सारे नकश बरआब ॥
सारे जान्दार दे गुलाम तुम्हें । ऐ अमलहाय सद सलाम तुम्हें ॥
सारे जान्दारको फँसा मारा । नहीं इस जीवका रहा चारा ॥
करके तदबीर तुमसे सब हारा । जिन्दा कर करके फिर फिर मारा ॥
देमुकद्दर बदस्त दाम तुम्हें । ऐ अमलहाय सद सलाम तुम्हें ॥
तूही बख्शिदा है अम नोअमाँ । मातहत तेरे सब हैं जिसभो जाँ ॥
तुझसे पैदा है वाणी वेदो कुराँ । अविदानो जाहिदाने जमाँ ॥
याद करते हैं सुबहो शाम तुम्हें । ऐ अमलहाय सद सलाम तुम्हें ॥
सारे मजहब जहामें जारी हैं । पीर मुरशिदकी राह दारी हैं ॥
अर्श फशोंकी सब तयारी है । आजिज इसरारसे सब आरी है ॥
पेशवा भी किये इमाम तुम्हें । ऐ अमलहाय सद सलाम तुम्हें ॥

कर्मोंके चिन्ह

कालपुरुषने जीवधारियोंके शरीरमें कर्मोंके चिन्ह हैं । इस जीवने पूर्वजन्ममें जैसे कर्म किये हैं उसकी देहमें वैसेही चिन्ह बने हैं । सब जीवोंके शरीरपर चिन्ह होते हैं परन्तु मनुष्यके शरीरपर भली भाँति स्पष्ट प्रगट होते हैं । इसी कारण मनुष्यकी देहहीसे इसके कर्मोंका भली प्रकार हिसाब किताब हो जाता है । मनुष्यके शरीरके चिन्ह देखनेसे भलाई बुराई जानी जासकती है । जिस समय स्त्री के गर्भमें वीर्य स्थिर होता है उसके भीतर जीव होता है उसजीवके साथ उसके पहलेके किये हुए कर्म बन रहते हैं उसके भाग्यके अनुसार उसका शरीर प्रस्तुत होता है, समस्त रंग डील डौल पूर्वकर्मोंके अनुसारही होता है । जब यह माता गर्भसे निकलता है तो उसके पूर्वजन्मके कर्मोंके चिन्ह उसके शरीर पर होते हैं, पाँच वर्षके भीतर ये चिन्ह स्पष्ट प्रगट नहीं होते, जैसे जैसे यह बड़ा होता जाता है वैसेही वैसे इसके पूर्व कर्मके चिन्हभी दिखाई देते जाते हैं । तिल और मत्सा

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