कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 797, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंऐसा मिलाया है कि, बिना भली प्रकार ध्यान दिये प्रत्येक मनुष्य उसको समझ नहीं सकता, मनुष्यहीकी आत्मा जब एक शरीर छोड़ती है तब दूसरी और तीसरी ओर अनगिनती देह धर धरके पुनः संसारमें आया जाया करती है।
४५ मुहम्मद बोध—कबीर साहबके ग्रन्थ मोहम्मद बोधमें लिखा है कि, मोहम्मद साहब पुनः उत्पन्न होंगे, उनको सत्यगुरुका उपदेश मिलेगा वे मुक्ति पावेंगे। इस बातपर नानक साहबकी साखी है। देखो नानकशाहकी जन्मसाखीमें लिखा है। जब नानकशाह भक्का गये थे उस समय मरदाना मीरासीसे कहा कि, मुहम्मद साहब पन्द्रह सौ वर्ष तक बैकुण्ठ में रहकर फिर पृथ्वीपर आकर एक शूद्रके गृहमें जन्म लेंगे। उनको परलोकी सत्यगुरु मिलेगा। उस गुरुकी दयासे वे परमधाम सिधारेंगे। यहाँ दोनों प्रतिष्ठित महापुरुषोंके कथनानुसार मुहम्मद साहबका आवागमन प्रमाणित होता है।
४६ प्रकृति नहीं बदलती—मनका विचार बदलनेके विषयमें मशकात किताब बाबुल ईमान अजाबुलक़ब्र अहमदसे रवायत अबीदरवासे इस प्रकार लिखा है कि, यदि तुम सुनो कि, एक पर्वत अपने स्थानसे टल गया तब तुम उसका विश्वास कर लेना। यदि सुनो कि, एक मनुष्यकी प्रकृति बदल गई तो कदापि विश्वास न करना। क्योंकि, मनुष्य अपनी प्रकृतिकी ओर झुका करता है। यह बात ठीक है कि, भाग्यने जो बनाया सो बन गया। मनुष्योंकी शिक्षा भी पशु-वोंको मनुष्योंके ढङ्गका बनाती है। कुरानमेंभी आया है कि, खुदा जिसको चाहे ईमान प्रदान करे, जिसको चाहे भटका दे। पूर्वजन्मके कर्मोंने स्वरूप बनाया। वर्तमान कृत्य उनको बदल सकते हैं। तीनों कालके कर्म आवागमनके बन्धनमें फँसे हुए हैं।
४७ अपनी आत्माका डालना—तौरीत तथा कुरान दोनोंसे यह बात प्रमाणित होती है कि, खुदाने आदमको अपने स्वरूपका बनाया। उसमें अपनी आत्मा डालदी। अतः खुदाने मनुष्यमें गमन किया। आदम सब मनुष्योंके भीतर गमन करते गये इस कारण एकसे अनगिनती हो गये। सर्व मनुष्यों का शरीर और आत्मा आदमका शरीर और आत्मा है आदमका शरीर और आत्मा खुदाका शरीर और आत्मा है। इस कारण सब मनुष्योंमें आदम आवागमन कर रहा है। आदममें खुदाने गमन किया। आदम खुदाकी आत्मा तथा शरीर है। देखो कुरानका (१४) सिपारा सूरत हजर (२) रकूअ (२९) आयतमें लिखा है :—