भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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यह अवस्था देखकर रुष्ट हुआ । उस बन्दरको तीन जूते मारे । जूतोंकी मार खाकर वह बन्दर अलग जा खड़ा हुआ एवं सलाम करके चला गया । जमीनदार बन्दरको बुलाता एवं खुशामद करता ही रह गया । पर वह उसके पास नहीं आया चला ही गया ।

बच्चेको निकाला—तिलोकरामजी उदासीने अपनी आँखसे देखा था कि, गङ्गाके किनारे पर एक पीपलका वृक्ष था । उसपर एक बँदरी बैठी थी । उसका बच्चा दैवात् कुएँमें गिर पड़ा । वह उस वृक्षकी जड़से लग रहा था । वह बच्चा कुएँमें गिरा तब उसने चीख मारी, उससे अनेक बन्दर एकत्रित हो गये । उनमें एक बन्दर बड़ा ही दृढ़ तथा मोटा और भयानक था । उसने उस वृक्षकी जड़को दृढ़ताके साथ दोनों हाथोंसे पकड़कर अपने दोनों पाँव कुएँमें लटका दिये । दूसरा बन्दर उसकी टाँग पकड़कर लटक गया । फिर तीसरा बन्दर उस दूसरे बन्दरकी टाँग पकड़कर लटक गया । इसी प्रकार फिर चौथा, पाँचवाँ, छठवाँ, सातवाँ सभी क्रमशः एक दूसरेकी टाँग पकड़कर लटकते गये । जब जलतक पहुँच गये, ऊपरसे नीचेतक बराबर सीढ़ी लग गई । गिरा हुआ बच्चा उसी सीढ़ीपर चढ़कर बाहर निकल आया । इसके पीछे सबसे नीचेवाला बन्दर ऊपर चढ़ आया । फिर उस नीचेवालेके बाद जो था वह निकला इसी प्रकार सब बन्दर जैसे लटके थे वैसेही ऊपर चढ़ आये । उन्होंने अपनी बुद्धिमानीसे अपने सजातीय बच्चेकी प्राण रक्षा की ।

गाडी हॉकनेवाला—सन् १८५६ ई. में पञ्जाब देशके फिरोजपुर नामक स्थानमें मनोहरदास वैरागी फिरा करता था उसके साथ गाडी रहती थी । वह प्रत्येक गांवमें जाया करता था उसके पास कितनेही जानवर थे उसने बन्दरको गाडी हॉकना सिखाया था । उसके साथ एक छोटी तोप थी वह बन्दर तोप भी चलाया करता था । कितनेही आश्चर्यमय कार्य किया करता था । उसके पास गायें थीं वे दूकान दूकानपर जाकर भीख मांग लाया करती थीं । उसने तोता मेंना और कुत्ते आदिको भली प्रकार काम करना सिखाया था । वे सब उसकी शिक्षानुसार काम किया करते थे ।

बुद्धिमती वानरी—मैंने सुना था कि, अमृतसरके समीपकी बस्ती रविदासपुरमें एक वैरागी था, चमार जातिवाले उसके बहुतसे शिष्य थे । उसके पास एक बँदरी थी । उसका सेवक एक वृद्ध था जो अफीम खाया करता था । उस स्थानपर दर्शनार्थ जो कोई जाता वह बँदरी उसका कपड़ा अथवा पाँव पकड़ लेती । जब वह उससे पूछता कि, तू क्या पैसा कौड़ी चाहती है ? तो वह

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