कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 832, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंप्रकारकी लीलायें करता है। उसको पकड़कर लोग प्रायः योरोपको ले जाते हैं वहाँ उसको बुद्धि तथा गुणकी अनेक बातें सिखाते हैं। यह बन्दर जिब्राल्टरके पर्वतोंपर भी अधिक होता है। बुद्धिके बड़े बड़े कार्य करता है।
रुपये लेनेवाला— पञ्जाब प्रदेशस्थ फीरोजपुर प्रान्तके अन्तर्गत दो बनजारा आरा चला रहे थे। वह जब रोटी खाने गये तो वृक्षसे एक बन्दर उत्तर कर उसी प्रकार आरा चलाने लगा। दोनों लकड़ियोंके बीचकी किल्लीको खींचा करने पर उसका अण्डकोष दोनों लकड़ियोंके बीच दब गया, जिससे वह चिल्लाने तथा तड़पने लगा। एकने आकर उसको छुड़ाया वह बन्दर कूदकर वृक्षपर चढ़ गया। वहाँसे लाकर एक रुपया बढईके सामने रखा। जब वह बन्दर कहों इधर उधर चलागया तब वो बढई सोचने लगा कि, इस बन्दरने रुपया कहाँसे पाया। समय पाकर वह वृक्षपर चढ़ गया उसने उस वृक्षपर और भी कई रुपये पाये। वह उन सबोंको उठा लाया। कुछ कालके पीछे जब वह बन्दर घूमता घामता आया वृक्षपर चढ़ा तो देखा कि, वहाँ उसका रुपया नहीं है। तब वह उस बढईके निकट आया चिल्लाता २ कौप कर गिर पड़ा तब उस स्थानके सब बन्दर उसका शब्द सुनकर एकत्रित हो गये। उस बढई की ओर देखकर खुर खुर करने लगे। जब उसने देखा कि, यह सब तो मुझको काटेंगे तो सब रुपये बन्दरके सामने फेंक दिये। उसने अपने सब रुपये गिनकर देख लिये कि ठीक हैं जाना कि, वह एक रुपया जिसको उस बन्दरने अपनी प्रसन्नतासे दिया था, रुपयोंके साथ लौटा दिया तो उस बन्दरने एक रुपया निकालकर अपने चूतडसे पोंछकर लकड़ी चौरनेवालेकी ओर फेंक दिया, बाकीके सब रुपयों को लेकर वहाँसे चला गया। समस्त बन्दर वहाँसे चले गये।
प्रत्युपकारी—एक और बन्दर इसी प्रकार आरा चौरनेकी नक़ल करने लगा तो उसका भी अण्डकोष लकड़ीके छिद्रमें दब गया वह चिल्लाने लगा। जो दोनों लकड़ी चौरनेवाले देख रहे थे। उनमेंसे एकने बन्दरको छुड़ाना चाहा दूसरा मना करने लगा कि, उस बन्दरको फँसकर मरने दे क्योंकि, यह हमारा अनुकरण करता है। दूसरेने उसका कहना न माना आकर छुड़ा दिया। जब बन्दर छूटा तो वनसे दो फल लाया और दोनों लकड़ी चौरनेवालोंकी चादर पर धर गया। जिसने उस बन्दरकी जान बचाई थी वह उन फलोंको खाकर बड़ा हर्षित हुआ। क्योंकि, वह बड़ाही स्वादिष्ठ फल था। दूसरा लकड़ी चौरनेवाला जो उसको छुड़ानेसे मना करता था उसने जब अपना फल खाया तो मर गया।