भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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करें । जब शेरने उसका मुँह देखा तो कूदा उछला और उस छड़के समीप आकर अपने पञ्जेसे उसको प्यार करने लगा तथा मुँह चाटने लगा । मारे प्रसन्नताके कौपने लगा, शेरकी भादा भी उसको प्यार करने दौड़ी । उस शेरने उसको भगा दिया । जिसमें वह भी उसकी आरोग्यतापर प्रसन्नता प्रगट करनेमें भाग न ले । तब वह रखवाला उस पिंजरेके भीतर घुस गया बारी बारी दोनोंको प्यार किया । इसके, पीछे प्रायः उन दोनोंके पास जाया करता था । उनपर उसका पूरा अधिकार था जो चाहे सो करावें वे दोनों उसको बहुत प्यार किया करते थे ।

रीछ और शेरकी मैत्री—निउआरलैंस नामक नगरमें एक बड़ी ही विचित्र घटना हुई । कौतुकी निर्दयी मनुष्योंने सन १८३२ ई० में एक पुराने हन्श देशके शेर बबरके पिंजरेमें एक रीछ डाल दिया । वह जिससे यह रीछके टुकड़े टुकड़े कर दे । इस निर्दयताका तमाशा देखनेके लिये अनेक मनुष्य एकत्रित थे । रीछ लड़नेके विचारसे उस शेरके सामने दौड़ा । पर जैसा लोगोंने अनुमान किया था वैसा नहीं हुआ । रीछने शेरके शिरपर अपना पञ्जा धर दिया मानों उसने अपनी दया प्रगट करके उसके साथ मैत्री करना चाहता हो । शेर इस ध्यानसे कि, यह रीछ मेरी शरण आया है, प्यार करता हुआ अत्यन्त रक्षा करता था । किसीको अपने पिंजड़ेके निकट नहीं आने देता था । अपने नवीन मित्रका बहुत ध्यान रखता था । यहाँ तक कि, आप भूखा रहकर भी उस रीछको भली प्रकार भोजन देता था ।

तेंदुआ—की शेरहीके समान ही आदत होती है । एक मनुष्यसे मालूम पड़ा कि, जब वह पथसे चला जाता था तो देखा कि, एक तेंदुआ उसकी राहके बीच खड़ा है । वह मनुष्य उसको देखते ही घबरा गया । उसको उस समय कोई युक्ति न सूझी पर अपनी टोपी उतारकर सलाम करके कहा कि, ऐ साहब ! सलाम । यह बात सुनते ही वह तेंदुआ उस मुसाफिरसे कुछ न कहकर चला गया ।

शेरका बच्चा—कुछ जहाजी लोग छः सप्ताहके एक शेरके बच्चेको जहाज पर उठा लाये । वह उनके साथ रहने तथा प्रेम करने लगा । यहाँ तक कि, वह उनके पलंगपर लेटा रहता था, जहाजी तकियाके स्थानपर उसको अपने शिरके नीचे रखकर लेटा करते थे । उसके बदले वह शेर जहाजियोंके खानेका मांस चुराकर खा जाया करता था । एक दिन उस शेरने बड़ईके खानेका मांस भी चुराया पर उसके मुँहमेंसे वह बड़ई फिर छीन ले गया । चोरीके बदले, उस शेरको खून मारा । उस शेरने कुत्तोंकी तरह दण्डको सहन कर लिया । वह वृक्षकी डालियोंपर बिल्लियोंकी तरह चढ़ जाया करता था, भाँति भाँतिके