कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 852, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंरोहीमें घास छपरमें पानी । मोड़ाकर मेरी भाँग मिलानी ॥
उस भैंसके प्रेममें इसी प्रकारका शब्द करता फिरता था । उसका शब्द सुनकर एक पथिकने उससे पूछा कि, तेरी यह दशा क्यों है ? उसने अपनी भैंसका सब हाल कह सुनाया । पचास साठ कोसके ऊपर एक वैसीही भैंस दिखाई दी । पथिकने उस जर्मीदारका सब हाल लोगोंको कह सुनाया । जब वह पथिक कह रहा था—उसी समय उस भैंसने भी अपने स्वामी जर्मीदारका सब वृत्तान्त सुना, तब उसका मन अपने स्वामीकी ओर खिंच आया । जबसे वह भैंस इस जर्मीदार से पृथक् हुई थी तबसे उस समय तक तीन वर्षका समय बीत चुका था । उसने दो बच्चे दिये थे । अब उसने जान लिया कि, मेरा स्वामी मेरे लिये रोता फिरता है । तो उस भैंसके मनमें प्रेम आया अर्ध निशाके समय, अपनी रस्सीको खोल लिया दोनों बच्चों सहित कुशल पूर्वक मालिकके गाँव पहुँच गई । घास चरकर जल पीकर तृप्त होकर बैठी ही थी कि, जर्मीदारने आवाज दी कि—
रोहीमें घास छपरमें पानी । मोटाकर मेरी भाँग मिलानी ।
जब जर्मीदारने ऐसा कहा तो वह भैंस उठकर बोली उसको पहचानकर वह जर्मीदार उसके निकट गया देखा तो उसकी भाँग मिलानी दोनों बच्चों सहित आ पहुँची है । जर्मीदार उसको अपने घर लाकर अत्यन्त प्रसन्न हुआ ।
महात्मा भैंसा — जिला फिरोजपुर तहसील भोगा डरौली गाँवके समीप एक गाँव छोटे फेरीवालाके नामसे है, इसमें एक भैंसा है । इसका यह हाल है कि, वह जब अपनी माताके गर्भमें था तो नियमित आकारसे अधिक बढ़ गया । इस कारण जब वह उत्पन्न हुआ तो उसकी माताका मूत्रमार्ग फट गया तब वह बाहर निकला । उसकी माता मर गई । वह बिना माताका बच्चा जीवित रह गया भैंसोंके स्वामी ने दो बकरियों मोल लीं उस बच्चेको बकरियोंका दूध पिलाकर पालने लगा । यह बचन कहा कि, यदि यह बच्चा जीवित रहेगा तो मैं उसको छोड़ दूंगा और इससे कोई काम न लूंगा अन्तमें बच्चा पलकर बड़ा हुआ बहुत बलिष्ठ स्वरूपवान और अच्छा भैंसा हुआ । उसके ऊपर छोटे छोटे बच्चे चढ़कर खेला करते थे । वह क्रुद्ध न होता था । कभी किसीको कुछ कष्ट न देता था । प्रायः लोग दूर दूरसे अपनी अपनी भैंसियोंको लाते और उससे गर्भिणी कराके लौटाले जाते । यह भैंसा अन्तर्यामी था । क्योंकि, वह अपनी पुत्रीसे कदापि सम्भोग न करता था । कोई मनुष्य जो अपनी भैंस उससे गर्भिणी कराकर दूर लेकर जाता था उसके वीर्यसे जो भैंस उत्पन्न हुई हो चाहें उसको उस भैंसने कभी देखा भी न हो । यदि वह भैंस उसके सामने आजाय तो भी उसके साथ कदापि सम्भोग न करे । जर्मीदार कितना