भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 858

कहानियों कही गई हैं। यह बहुत बलिष्ठ होता है बड़े बड़े पशुओंकी हड्डियों चबा जाता है। यह सड़ा गला मांस खाया करता है। लोग कहते हैं कि, यह वास्तवमें हिजड़ा होता है। प्रत्येक वर्ष यह अपना ढङ्ग बदलता है। एक वर्षमें यह स्त्री तथा दूसरे वर्ष में पुरुष हो जाता है इसी प्रकार यह सदैव स्त्री पुरुष हुआ करता है। यदि उसकी छाया कुत्ते पर पड़ जाय तो गूंगा हो जाता है। पर जब वह कुत्ता बोलता है तो मनुष्योंके समान बोलता है वंसीही बातें करने लगता है। यह कुत्ता प्रत्येक मनुष्यका नाम लेकर बुलाता है। यह पुराने लोगोंका ख्याल् ३। अंग्रेजी पुस्तकोंमें इसके विषयमें बहुत कुछ लिखा है। चरक पर डाइन स्त्रियाँ सवार हुआ करती हैं।

स्यार

स्यार गीदड़को कहते हैं। गीदड़की बुद्धिमानीकी अनेक कहानियाँ विख्यात हैं। सियारको शेरका मन्त्री कहते हैं। क्योंकि, जब कहीं आखेट नहीं दिखाई देती तब स्यार एक ऐसा शब्द करता है कि, जिससे शेर जान जाता है कि, आखेट कहीं समीपही है। तैयार होके उसको मार लेता है। गीदड़ उसके खानेके पीछे बचा मांस खाकर अपनी उदर पूर्ति करता है। शेरकी सहायतासे सदैव कृतकार्य होता रहता है। इसकी बुद्धिमानीकी अनेक कहानियाँ हैं। स्यारसे बहुतेरे मनुष्य शुभा-शुभका विचार किया करते हैं भले बुरे भाग्यको जाना करते हैं। इस कारण पूर्वीय भारतके मनुष्य इसको स्यार पांडे कहा करते हैं इसे पशुओंमें धूर्त जाति मानते हैं। इस विषय पर कबीर साहबका वचन है कि, जो मनुष्य पुराण पढ़ते पढ़ाते तथा सुनाते हैं पर सारको ग्रहण नहीं करते वे मरकर स्यार होते हैं पूर्वजन्म की बुद्धि तथा चैतन्यता इस जन्ममें भी काम देती है। यह बात भी प्रसिद्ध है कि, स्यार रविवारका व्रत रखा करते हैं जिस दिन रविवारका व्रत करते हैं उस दिन कुछ खाते पीते नहीं हैं। लोग कहा करते हैं कि -

पशु तनसे हुं बरत एतवारा । राखें शूकर श्वान सियारा ।

पूर्वजन्मके रंगे स्यार कथा पुराण सुनाके, लोगोंको पूजा पाठकी युक्ति बताते हुए भी स्वयम् कुछ न करते थे, इसी कारण स्यार हुये हैं। इसके शरीरसे बड़ी दुर्गन्धि आती रहती है इस कारण लोगोंको इससे बड़ी घृणा होती है। इस पशुको कोई भी पालना पसन्द नहीं करता। भूखमें सड़ा मांस तथा विष्ठा आदि खाया करता है। स्यार पांडेके पास यद्यपि अब कुछ भी ढोंगका सामान नहीं तथापि ज्योतिष विद्या अब भी कुछ उनके पास है। तिथि तथा दिन इत्यादि जान लिया