भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 857

उसने उत्तर दिया कि, अपोलो देवताका है। यह बात सुनकर बादशाह बहुत क्रुद्ध हुआ। वर्जनाको जीवितही पृथ्वीतलमें गड़वा दोनों पुत्रोंको नदीमें फेंकवा दिया। दोनों बच्चे टेबर नदीमें पड़े हुए भी आंधी लहरोंसे किनारे जा लगे। उनके रोनका शब्द सुनकर एक मादा भेड़िया दौड़ आई। दोनोंको निज मांदमें उठा ले गई। अपने बच्चोंके समान उनको पाला। अपना दूध पिलाया। वे दोनों अपनी धर्मकी माता द्वारा पलकर बहुत बड़े हुये। उनकी धर्मकी माता पालनपोषनमें बहुत ध्यान देती थी। वे दोनों महावीर तथा बलिष्ठ हुये। उनमेंसे एकका नाम एम्यूलस और दूसरेका नाम एम्स था। वे दोनों वहाँके बादशाहको मार उस देशके प्रसिद्ध राजा हुये।

नरकन्या—ऐसी सुनी है कि, अवध पश्चिमोत्तर प्रान्त अथवा वर्तमान युक्तप्रदेशके किसी गांवमेंसे किसी मुसलमानकी लड़कीको एक भेड़िया उठा ले गया। उसने अपनी मांदमें रख दिया और नहीं खाया। उस लड़कीको भेड़ियेका दूध पिलाकर पाला। जब वह लड़की बड़ी हुई तो भेड़ियाके ही समान उसकी आदत हो गई। चौपायोंके समान चलने लगी। भेड़ियोंकी तरह भयानक होकर क्रमशः युवावस्थाके समीप पहुँची। एक दिन उसके घरके लोग उसको देखकर पकड़ लाये। एक वृक्षके नीचे बाँध दिया। वह घरके भीतर रहनेसे बहुत घबराने तथा भेड़ियोंके समान चिल्लाने लगी। वह कच्चा मांस खाती दूसरी कोई चीज न चाहती थी यदि उसको कपड़ा पहनाया जाता तो कपड़ेको चीर फाड़कर अलग कर देती। कितने दिनोंतक तो उसकी यही अवस्था रही। जिसने उस लड़कीको पाला और दूध पिलाया था वह मादा भेड़िया उसके चारों ओर फिर फिर कर चिल्लाती थी। वह लड़की भी अपनी दूध पिलाई माताको देखकर बहुत छटपटाती थी पर लोग बहुत सचेत रहते उस भेड़ियाको मारकर भगा देते थे। अन्तमें वह उसको छोड़ गई उस लड़कीको लोग शिक्षा देने लगे। पहले कच्चा मांस फिर पक्का फिर रोटी खानेकी आदत डलवाई। मनुष्यकी बोली बोलना सिखाया। कपड़ा पहनना सिखाया। मनुष्यके सब नियम सिखाये। पर वह मनुष्यके समान थोड़ा ही बोल सकती थी। मनुष्यके समान स्वच्छ बोली न हुई तथा चाल ढाल भी न्यारीही रही।

भेड़ियेका पाला मनुष्य—सुना था कि, एक मनुष्य लखनऊमें पकड़ आया था वह भेड़ियाकी मांदमें मिला था भेड़ियोंकीसीही उसमें आदत भी थी। वह बड़ा भयानक था यह मनुष्य जन्मकालसे ही भेड़ियोंमें रह गया था।

चरक

चरक एक पशु भेड़ियेके समान होता है। उसके विषयमें कितनीही विचित्र