कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंकभी कोई क्षति नहीं की है वरन् आपका तथा आपके समस्त सम्बन्धियोंकी प्रशंसा ही करता रहा हूँ। आपको बहुत श्रेष्ठ जानता था। ऐ महाशय ! आप चले जाइये। हमको किसी प्रकारका कष्ट न दीजिये। इतनी बात सुनते ही वह रीछ परम दयालु प्रतीत होने लगा। चुपके चुपके पीछे फिर गया।
यांत्रिक उपाय—सिङ्गाली लोग अपने गलेमें एक यन्त्र बाँध लेते हैं अथवा अपने बालोंमें रख लेते हैं जिससे रीछके सताये जानेसे बच जाते हैं।
मानुषी भोगी—एक मनुष्य द्वारा जाना गया कि, कुछ मनुष्य एक पर्वतके निकट रातको गये। वे अचेत होकर सो गये तो उससे एक रीछ आया। एक स्त्रीको उठा ले गया। कई दिनों तक वह रीछ उस स्त्रीको एक छिपी जगहमें छिपाये रहा। उसके साथ सम्भोग भी करता रहा। पर्वतसे लाकर भौंति भौंतिके फल खिलाता रहा। एक दिन उस स्त्रीका पति अपनी पत्नीको दृढ़ता हुआ उस स्थानपर पहुँचा। देखा कि, वह स्त्री बैठी है तथा उसकी जांघपर शिर धरकर वह रीछ सोया पड़ा है। उस मर्दने स्त्रीसे कहा कि, तू चली आ। स्त्रीने इशारा किया कि, मैं कैसे आऊँ? स्त्रीने जब अपनी देह हिलायी तो उस रीछने जागकर पुरुषपर हमला किया। उस मर्दने बन्दूकसे ऐसी गोली मारी कि, वह रीछ वहीं मर गया। वह अपनी स्त्रीको लेकर अपने घर चला आया।
भेड़िया।
भेड़िया भारतवर्षमें एक विख्यात हिंसक जन्तु है। वह बड़ी युक्तिसे आखेट किया करता है। बहुतेरे भेड़िये आपसमें मेल करके इकट्ठे हो बड़े बड़े शीघ्रगामी तथा तीक्ष्ण बुद्धिके पशुओंको मार लिया करते हैं। वे अर्द्ध चन्द्राकार व्यूह बाँधकर छिपके बैठते हैं। पर्वतके ऊपरसे आखेटको ढालकी ओर रगेदकर गिरा देते हैं जिससे वह किसी ओर भाग जानेका पथ न पा नीचेकी ओर गिरने लगता है। उस समय अर्द्धचन्द्राकारमें बैठे हुए भेड़िये झटपट निकलकर उसे खा जाते हैं। इसी प्रकार भेड़ियोंकी अनेक धूर्ततायें प्रसिद्ध हैं।
शाह एम्प्यूलस तथा एम्स—रूमके इतिहासमें लिखा है कि, इतालिया देशके बादशाहके मरनेपर राजधानीमें दूसरा बादशाह सिंहासनारूढ़ हुआ। उसने पहिले बादशाहकी एकलौती पुत्री वर्जिनाको फकीरनी बनाकर अपोलो देवताके मन्दिर में सेवाके लिये नियुक्त कर दिया। वर्जिना उस मूर्तिकी सेवा पूजा करने लगी। उसको देवताकी पूजाहीमें लगा दिया, विवाह न किया। बादशाहको भय था कि, लड़कीकी सन्तान राज्य लाभका उद्योग न कर बैठे पर कुछ दिवसोंके पीछे वर्जिनाने दो पुत्र जने। तब बादशाहने पूछा कि, यह किसका गर्भ था।