भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 873

स्पर्शानियल रोवर कुत्ता—सेण्टजान साहबके पास था । वह सारी बातें समझता था आज्ञानुसार सारे काम किया करता था, अपने स्वामीका बड़ाही आज़ाकारी था । उस कुत्तेका नाम रोवर था । उसका स्वामी कहे कि, रोवर ! आज तुम घरमें रहो, मैं तुमको अपने साथ बाहर नहीं लेजा सकता, तो रोवर बाहर जानेकी कभी भी इच्छा न करता, यदि वह कहदे कि, मैं आज रोवरको साथ ले जाऊंगा तो रोवर पहिलेसेही तयार होकर चलनेकी प्रतीक्षा करता रहता । एक रातको सलाह होरही थी कि, कल सबेरे आखेटको जावेंगे । कुत्ता भी समस्त बातें सुनता था । समय पर आपसे आप वह वहाँ जा पहुँचा जहाँ कि, सारे मनुष्य इकट्ठे थे, वह भयभीत हो मुंह बनाता हुआ उस स्थानपर पहुँचा कि, ऐसा न हो कि, मेरे ऊपर रुष्ट हो क्योंकि, मैं बिना आज़ा चला आया हूँ । किसी प्रकारका क्रोध न दिखाने पर वह कूद २ कर प्रसन्न होने लगा ।

सामनामका कुत्ता ।

साम—एक साहबके पास था उसका स्वामी कहता था कि, ऐ साम तु अन्यान्य कुत्तोंके साथ खेल कौतुक दिखा तो वह तुरन्त कौतुक दिखानेमें संलग्न होता, भाँति भाँतिके कौतुक दिखाता । एक दिन वह अपने स्वामीके साथ एक स्त्रीके घर गया । उसने जान लिया कि, यही प्रसिद्ध साम है । उसने कहा कि, आजकें दिन सामको मेरे यहाँ रहने दीजिये सामने अपने स्वामीसे क्षमा मांगी, उसके स्वामीने आज़ा दी कि, वह उस स्त्रीके साथ रहे उसका पहरा दे । कुछ काल तक उसके घरमें रहने पर उसका स्वामी उसको लेने आया । स्त्रीने कहा कि, कलके दिन सांझको मेरे घरमें रहने दीजिये । उसके स्वामीने उस कुत्तेको बहुत प्यार किया कहा कि, कल भोजनके समय तक इनके घर रहो, भोजन करके चले आना । उस कुत्तेने बात मानली । दूसरे दिन भोजनके समय तक उपस्थित रहा, भोजन करके स्त्रीकी ओर देखा पूछ हिलाई और उसके घरसे निकल कर अपने घर भाग आया । वह कुत्ता अपने स्वामीको वस्त्र लाता था । उसके पहननेके सारे वस्त्रोंका नाम जानता था । भोजन करनेके समय कुरसी पर बैठता था, किसी प्रकारका शब्द न करता था रोटी माँस अथवा दूध इत्यादि खाता कोई कहे साम ! एक टुकड़ा मुझे भी दे तो वह तुरन्त मान लेता था । जब सब चले जाते, तब वह सारी वस्तुओंको साफ किया करता । अस्तबल जाकर अपने स्वामीके लिये घोड़ा तैयार करा लाया करता । साईसको आज़ा देता घोड़ेकी जीनके पीछे सवार हुआ करता । तात्पर्य यह कि उससे कहीं हुई सारी बातें समझ लेता वो बड़ाही कृतज्ञ तथा नेक कुत्ता था ।