कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 882, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंलांडकी डाइनबिल्ली—एक बार लांड कोचरेन साहब उत्तरसागरके यात्रा कर रहे थे। उनके साथ एक काली बिल्ली भी थी। वह ऋतु बहुतही खराब था सदैव तुफान आया करता था वायु ठीक नहीं बहती थी। जहाजवाले इस प्रकार कहने लगे कि, सारी आपत्तियां उसी काली बिल्लीके कारण है जो कि, लांड साहबके साथ है। यह बात लांड साहबसे कही गई कि, आपके साथ जो काली बिल्ली है यह डायन है। साहबने कहा कि, यह तो भ्रम है पर जो तुम्हारी ऐसीही इच्छा है तो इसको पानीमें डाल दो। यह बात सुनकर सब मनुष्य भयभीत हो निवेदन करने लगे कि, साहब। ! ऐसा कार्य न कीजियेगा। जब आप इसको समुद्रमें फिकवाओगे तो वह और उपद्रव करेगी जिससे हम लोगोंके प्राणोंपर आपत्ति आवेगी। इससे यही उचित है कि, आप इस बिल्लीको दुःख न दीजिये, सुखसे रहने दीजिये। उन्होंने कहा कि, यदि आप इस बिल्लीको न छोड़ेंगे तो हमको आशा है कि, हम लोग कुशलपूर्वक अपने देश इङ्ग्लिस्थानको पहुँच सकेंगे। काली बिल्लीको लोग प्रायः डायन समझते हैं।
रक्तदानसे आपत्ति—उपरोक्त पुस्तकका लेखक यह भी लिखता है कि, एक बार एक गँवारिन हाथमें एक प्याला लिये मुझसे कहने लगी कि, मुझको आप अपने काली बिल्लीके बच्चेकी पूछमेंसे रक्तकी कुछ बूंदें दीजिये जिसमें मेरे घरके चूल्हेमें बरकत आ जाय बला दूर हो। दूसरी स्त्रीने आकर मुझसे कहा कि, सावधान ! भूलना नहीं काली बिल्ली कदापि अपने पाससे पृथक् करना न रक्त देना। यदि उसको बाहर करोगे तो उसीके साथ सौभाग्य और बरकत भी बिदा हो जायगी।
डायनकी सवारीकी शंका—कप्तान ब्राउन साहब कहते हैं कि, स्काटलैण्डके लोगोंका यह नियम था कि, वहाँके दालानोंमें लोग अपनी बिल्लियां बांध बांध कर रखते थे। वे अनुमान करते थे कि, आज की रात डायन बिल्लियोंपर सवार होगी इसी कारण उनसे अपनी २ बिल्लीको बचानेके लिये युक्तियां करते थे। जो लोग यह सावधानी करना भूल जाते थे, वे आपत्तिमें पड़ते देखते कि, उनकी बिल्लियां घरसे निकल कर बनमें भागी जाती हैं। प्रत्येकके ऊपर डायने सवार हैं नारवेंकी बड़ी सड़क पर चली जाती हैं। काली बिल्लीका अङ्गरेजीमें बहुत कुछ विवरण है, इंग्लैण्ड, स्काटलैण्ड और आयरलैण्डके मनुष्य इसके विषयमें अनुमान करते हैं कि, इसके कारण कितनीही आपत्तियां आती हैं कितनीही दूर हो जाती हैं। यह भी अनुमान करते हैं कि, बिल्लियां, मनुष्योंकी तरह बातें किया करती हैं। लेखक लिखता है कि, मैंने लण्डन अपने घरके पिछवाड़े अनेक बिल्लि-