भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 881

गई जहां रहती थी वहांसे उसका देश नौ दिनकी यात्राका मार्ग था । भेड़ वहांसे चली उसका बच्चा उसके साथ था । बच्चा थक कर पीछे रह जाता तो प्रेमके साथ फिर उसको साथ लेकर फिर आगे चलती जिस समय वह अष्टरालिंग नगरमें पहुँची थी वहाँ वार्षिक मेलेका दिन था । भेड़ मेलेमें नहीं घुसी नगरके किनारे बैठी रही, बड़े तड़के उसने अपनी राहली । केवल एक कुत्तोंने उसको एक स्थान पर चारों ओरसे घेरा पर उसने उनका सामना करके फिर अपनी राहली । एक मनुष्यने उसको भटकी हुई समझकर पकड़ रक्खा पर किसी प्रकार उसके हाथसे भी निकल कर वह फिर आगे चली जहां उसके जानेकी इच्छा थी वहाँ जा पहुँची ।

एक साहब सड़क पर भ्रमण करता हुआ चला जाता था । उसके पास एक भेड़ मिमियाती चिल्लाती हुई आई उसका मुहँ ताकने लगी उसने जान लिया कि, यह भेड़ मेरी सहायता चाहती है । वह साहब घोड़े से उतरकर उसके साथ हो लिया । भेड़ आगे आगे चली उसको एक स्थानमें ले गयी । वहां जाकर देखा कि, भेड़का बच्चा दो पत्थरोंके बीचमें फँसा है । उसका पांव ऊपरको है और वह तड़प रहा है साहबने उस बच्चेको निकाल कर उसकी माताको सौंप दिया । उसकी माता अपनी भाषामें धन्यवाद देनेके साथ साहबको कृतज्ञता भरी दृष्टिसे देखती हुई अपना बच्चा लिये चली गई । यह बात ब्राउन साहबकी नेचरल हिस्ट्रीमें लिखी हुई है ।

लोमडी

लोमडी बहुत ही चैतन्य होती है । किताबोंमें इसकी अनेक बातें लिखी हैं । लोमडियोंको भविष्यका बहुत ध्यान रहा करता है क्योंकि, वे जो कुछ खाती हैं उससे बचे भोजनको स्थान स्थान पर गाड़ देती हैं । उस पर चिन्ह भी कर देती हैं, जिसमें वह स्थान भूल न जाय अपनी गड़ी हुई जमाको भली भाँति पहचान ले । जब उनका मन चाहता है निकाल कर खा लेती हैं—बड़ी बुद्धि-मानीसे सचेत होकर आखेट करती हैं ।

बिल्ली और डायन

बहुत दिवसोंसे लोगोंका ऐसा ध्यान है कि, बिल्लियां जादूगार स्त्रियोंके साथ रहा करती हैं । वे ऐसा भी समझते हैं कि, स्वयम् डाइन बिल्लियोंके रूपमें होती हैं । डायन दुराचारिणी, भ्रष्ट तथा भाँति भाँतिके छलकपटोंसे भरी हुई रहती हैं । वे किसी छिपे हुये कार्यमें अथवा यात्राके लिये जाती हैं तो बिल्लीके स्वरूपमें होकर भ्रमण करती हैं ।