भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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बन्द बना लेते वह साँप न तो कभी काटता एवं न किसी प्रकारकी पीड़ा ही पहुँचाता ।

चेमरलेन—एक प्रकारका साँप होता है । उसकी यह दशा होती है कि, वह केवल वायु खाकर ही रहता है और अनेक दिवसों तक कुछ नहीं खाता । एकही स्थानपर पड़ा रहता है । दूसरा गुण उसमें यह है कि, पलके पलमें अपना रङ्ग बदल लेता है । पहले एक रङ्ग फिर दूसरा रङ्ग बदला करता है ।

चेमरलेनके रङ्गपर मत—विद्वानोंने उसकी ऐसी बात जाँच की है कि, उसकी जिह्वा बहुत लम्बी होती है, वह अपनी जिह्वाको दूर तक बढ़ा सकता है । उसके द्वारा कुछ खाता पीता रहता है । पर इस विचारमें कुछ पुष्टता नहीं है रंग बदलनेका भी कारण यह बताते हैं कि, जहाँ चेमरलेन रहता है उस स्थानपर रङ्ग विरङ्गके दाने तथा कड़कड़ आदि पड़े रहते हैं उसकी चमकसे उसका रङ्ग भौंति भौंतिका दिखाई देता है । वास्तवमें उसके अनेक रंग नहीं हैं ।

बिच्छू ।

सापोंकी तरह बिच्छूओंमें भी अनेक जातियाँ होती हैं इनके भी विषके उतार चढ़ाव साँपके विषोंकी तरह ही होता है, गोबरसे पैदा होनेवाले सूत्र बिच्छूओंसे लेकर इतने बड़े जहरी होते हैं कि, जिनका डंक लगनेसे पहाड़की बड़ी चट्टान भी संखिया विषके रूपमें परिणत हो जाती है । यह दो अंगुलसे लेकर बकरिये बच्चके बराबर बड़ा होता है इन सबमें पहाड़ी बिच्छू अत्यन्त ही विषैला होता है ।

बादशाहका जहर—मैंने अपने पितासे सुना था कि, एक बार एक बड़ा साँप भागा जाता था । मानो वह सर्प अत्यन्त भयसे भागा जाता हो । समीपही एक बागमें किसी नौव्वाबका लशकर पड़ा था । पड़ाव पर बहुतेरे देग आदि रक्खे थे । साँप भागता हुआ गया एक देगमें छिप गया । वह सर्प कुण्डल मारकर बैठ गया । नौव्वाबके नौकरोंने देग उलट दी, साँप उसीके भीतर पड़ा रहा । कुछ कालके बाद वहाँ बिच्छूओंकी सैन्य आपहुँची । सहस्रों बिच्छूओंने आकर उस देगको चारों ओरसे घेर लिया । जितने बिच्छू आते जाते थे सबके सब उसी देगको घेरते जाते थे । अन्तमें सबसे पीछे काले बिच्छूपर सवार श्वेत वर्णका एक छोटा बिच्छू आया । बिच्छूओंके बादशाहके आपहुँचनेपर सारे बिच्छू अत्यन्त प्रतिष्ठा पूर्वक पीछे हट गये उसको पथ दे दिया । वह देगके निकट गया । देगके चारों ओर फिरा उसको भीतर जानेका कोई मार्ग नहीं मिला । वह देगक ऊपर चढ़ गया तीन बार अपना डङ्का देग पर मार कर उतर आया, अपनी सवारी