भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

पृष्ठ 908, कुल 1367 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 908

राजा भोज और चैंटी, काशीके बकरियाकुंडका इतिहास ।

मैंने सुना था कि, सुलेमान शाहके समान राजा भोजभी पशुओंकी बातें समझ सकता था, एक दिन ऐसी घटना हुई कि, राजा भोज भोजन कर रहा था । एक चूरा पृथ्वीपर गिर पड़ा, जिसको एक चैंटी उठा ले चली । आगे एक दूसरी चैंटी मिली । उसने उससे कहा कि यह दाना मुझको दे, तू जाकर दूसरा उठा ला । चैंटीने कहा कि, मैं तुझको क्यों दूँ ? तू आपही जाकर ले आ । उसने कहा कि, मैं तो जातिकी चमारी हूँ, मैं राजाके थालके पास कैसे जा सकती हूँ ? तू ब्राह्मणी है तू जाकर लेआ यह बात जानकर राजा भोज हँसा । रानीने हँसीका कारण पूछा राजाने दोनों चैंटियोंका हाल कहा । रानीने कहा कि, मुझको भी यह विद्या सिखा दो । राजाने कहा कि, यह मुझको आज्ञा नहीं, यदि कहूँगा तो भर जाऊँगा । यद्यपि बहुत कुछ मना किया पर रानीने न माना, राजा विवश हुआ कहा कि, अब मुझको मरनाही पड़ेगा, अच्छा है कि, काशी चलकर बताऊँ क्योंकि, वहाँ मरनेसे मुक्ति प्राप्त होगी । बनारसमें पहुँचा तो देखा कि, एक, बकरी बकरा चरते फिरते हैं । एकस्थान पर एक फूटा कुवाँ था, उसके चहुँओर हरी २ घास उगी थी । बकरीने कहा, कि, मुझको यह हरी घास लादे तो मैं इसे खाऊँ । बकरेने कहा कि, मैं यह कार्य नहीं करूँगा । मैं राजा भोजके समान मूर्ख नहीं हूँ कि, एक स्त्रीके कहनेसे अपना प्राण गवाँ दूँ । बकरा बकरीकी यह बात सुनकर राजा चैतन्य हुआ, अपनी रानीको भली प्रकार डाँटा मारा, यह भी कह दिया कि, यदि तू फिर मुझसे पूछेगी तो मैं तुझको मार डालूँगा रानी चुप हो रही कोई बात नहीं कही । जहाँ पर राजाने बकरा बकरीकी बातें सुनी थी उसका नाम बकरियाकुण्ड है । मैंने उस स्थानको अपनी आँखोंसे देखा है, मैं उस बकरियाकुण्डके समीप छः माससे भी अधिक रहा था प्रत्येक वर्ष बकरियाकुण्डका मेला लगता है । अनेक मसखरे और कामीपुरुष तथा स्त्रियाँ वहाँ एकत्रित होती हैं । यह काशीका प्रसिद्ध मेला है ।

पक्षी ।

अब यहाँ पर एम्. आर एसली साहब और अन्यान्य अंग्रेजी पुस्तकों तथा अपनी बुद्धिके अनुसार पक्षियों की बातें भी लिखता हूँ ।

गिद्धकी—मुदूढ़ तीक्ष्णदृष्टि होती है, यह बहुत ऊँचा उड़ सकता है । इसमें तीन गुण हैं । प्रथम तो इसको देखनेकी शक्ति अत्यन्त तीक्ष्ण होती है । दूसरे इसकी सृंघलनेकी बड़ी शक्ति होती है । तीसरे सुननेके बलसे अपने आखेट पर टूटता है । इसके इन तीनों बलोंको स्वभाव वादियोंनेभी भली प्रकार जाँच कर देख लिया है । गिद्ध तीनों गुणोंसे विभूषित है । इन्हीं तीनों गुणोंद्वारा जान