कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 913, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंलगलगका स्वरूप धारण करके आते हैं वे अपने देशको पलट जाते हैं फिर व मनुष्यके स्वरूपमें हो जाते हैं मिश्री मनुष्य उनको पवित्र पक्षी मानते हैं ।
राजहंस ।
पूर्वोक्त पुस्तकमें राजहंसका हाल लिखा है कि, यह पक्षी अत्यन्त सुन्दर होता है, एक श्वेत तथा दूसरी काली ये उनमें दो जातियाँ हैं । राजहंस ऐसे शीघ्रगामी होते हैं, एक घण्टेमें एकसौ मीलतक उड़ जाते हैं । उथले जलमें तैरते फिरते हैं अथवा बहुतसे इकट्ठे उड़ते फिरते हैं, उनके पङ्खोंकी लेखनी बनाई जाती है । जहाँ वे चरते हैं वहाँ एक चौकीदार खड़ा रहता है जो बड़ी चौकशीसे इधर उधर देखता रहता है । जब कहीं कुछ आपत्ति दीखती है तो तुरंतही अङ्गरेजी बिगुलकी तरह शब्द करता है उसी समय सब सचेत हो बरीसे बच जाते हैं ।
राजहंसिनीकी सावधानी—प्टारफोर्ड नगरकी बात है कि, एक राजहंसिनी अठारह वर्षसे रहती थी, उसने अनेक अण्डे बच्चे दिये थे । उसके पड़ोसी लोग उसे अच्छा मानते थे । वह एक बार अपने चार पाँच अण्डोंपर बँठी थी । बहुत घास फूस जमा करनेमें लगीसी जान पड़ती थी । अपने घोंसलेको ढाई फीट ऊँचा कर लिया उसमें अपने अण्डोंको सुरक्षित रूपसे रक्खा । उसी रात ऐसी वर्षा हुई और इतना जल बढ़ा कि, सब कुछ डूब गया । इस विषयसे समस्त मनुष्य अनभिज्ञ थे, वर्षाका चिह्नभी कहीं नहीं था कि, वे लोग उससे बचनेका प्रबन्ध करते । एक बारही महावेगसे वर्षा हुई, सब कुछ डूब गया । पक्षीने पूर्व-सेही सब प्रबन्ध कर रक्खा था । उसके अण्डे जलसे ऊपर रहकर बच गये । देखो इस पक्षीका भी भविष्यदज्ञान और सावधानी मनुष्यसे कितनी बढ़कर है ।
मयूर ।
एक स्थानपर जहाँ मैं रहता था वो बस्तीसे दूर एक उजाड़ था । मेरी झोपड़ीके ईर्दगिर्द लोग जानवरोंके लिये दाने बिखेर जाते थे वहाँपर छोटे छोटे पशु पक्षी आह्लाद पूर्वक चरा करते थे । एक दिन एक मयूर अपने आनन्दमें मग्न हो डुम पसारने नाच रहा था । उस समय एक मनुष्य छिपकर धीरे धीरे आया । मोरको पकड़ लिया । आगे कहनेसे फिर उसको छोड़ दिया । छोड़ते ही वह उड़कर दूर भागा । उसने अपने सजातियोंको यह समाचार पहुँचाया, उस दिनसे कोई भी मोर वहाँ नहीं आया । बहुतेरे मोर प्रत्येक दिन दाना चुनने आते इस दिनसे समस्त मोरोंने एक एक करके वहाँका आना छोड़ दिया । इस मोरने अपने सजातियोंको सूचित किया कि, उधर न जाओ प्राणाघातका जाल बिछा हुआ है ।