कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 912, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंलगलगके राजाका न्याय—ऐसीही एक और कहानी है, बर्लीन नगरके निकट एक मनुष्यके धुवोंकशर्म एक लगलगने अपना खोता लगाया। वहाँ पर एक मनुष्य चढ़ गया उस घोंसलेमें एक अण्डा पाकर उठा लाया, उसकी जगह एक राजहंसका अण्डा रख आया। वह लगलग उस दगाबाजीसे अनभिज्ञ था। वह अण्डा जब पका उसमें से बच्चा निकला। नर लगलगने बच्चेके रङ्ग ढङ्गमें विभिन्नता देखी, अपने घोंसलेके चारों ओर चिल्लाता फिरा, अपने खोतेके चारों ओर कई बेर फिरकर अन्तर्धान हो गया, मादा लगलग तीन दिनोंतक उस अजनबी सन्तानकी रक्षा करती रही। चौथे दिन लोगोंने बहुत चिल्लाहट सुनी, देखा कि, उस मकानके समीप खेतमें पाँच सौ लगलग एकत्रित हैं। उनमेंसे एक बीस गजके अन्तर पर खड़ा ऐसा जान पड़ता था, मानो वह अन्यान्य लगलगोंसे बातें कर रहा है। सारे लगलग उसकी बातको ध्यान पूर्वक सुन रहे थे। जब वह बात सुनाकर अलग हुआ फिर दूसरा निकला उसी प्रकार वह भी बातेंकरने लगा—सब उसकी बातोंको सुनते रहे। फिर उसके हटनेपर तीसरा आया, उसी प्रकार अपनी बात कह अलग होकर खड़ा हुआ, इसी प्रकार और कई आते रहे और अपनी २ बात कहकर हट जाया करते थे। इसी प्रकार ग्यारह बजेतक मुकद्दमा होता रहा, बराबर रूपकारी जाँच होती रही। वह मादा लगलग अपने घोंसलेमें बैठी सारी बातें सुन रही थी। इसके पीछे समस्त लगलग भयानक शब्द करते हुए उठे समस्त लगलगोंका अगुवा और मुद्दी लगलग जो जाना जाता था उसने बड़े जोरसे तीन चार बार उस मादा लगलगको मारके घोंसलेके नीचे गिरा दिया। इसके पीछे सारे लगलग उस मादापर टूटे उसको उसकी अजनबी सन्तान सहित मारके नष्ट कर दिया। उस मादा लगलगने न कुछ कहा न अपवाद किया न वह वहाँसे भागी। समस्त लगलगोंने उस जगह घोंसलेका नाम निशान न रहने दिया पीछे सब वहाँसे चले गये। इसके पीछे कोई भी लगलग वहाँ दिखाई न दिया।
अनुमान—अलीमानके लोग ऐसा अनुमान करते हैं कि, लगलग बुरे मनुष्योंके घरके समीप अपना घोंसला नहीं बनाता। यदि किसी घरवालेके निकट घोंसला बनावे वह गृहस्वामी उसको मार डाले तो लोग उसको म्याजिस्ट्रेटके सामने लेजाकर उसके खूनका दावा करते हैं। एक बड़ा अस्पताल सारस तथा लगलगोंके लिये बना हुआ है। इस औषधालयमें रोगी सारस तथा लगलगको रखते हैं, जब वे मर जाते हैं तो उनको गाड़ देते हैं। लोग ऐसा अनुमान करते हैं कि, वे सब मनुष्य हैं। दूरके टापुओंमें रहते हैं। बरबर देश देखनेको