भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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अपने परोंके कतरे जानेके कारण उसकी बुलाहट स्वीकार नहीं की । कुछ, दिनोंके पीछे वह जड़ली लगलग कालेजके आँगनमें आगया, घरेलूको देखनेके लिये अपने पर खड़खड़ाये । घरेला लगलग उसकी अगवानीके लिये चला पर जंगली लगलग अत्यन्त रुष्ट होकर घरेलूके ऊपर दौड़ा । घरके लोगोंने बचाया । पर वह जड़ली सारी गरमीकी ऋतुभर उस घरेलूको कष्ट पहुँचाता तथा आक्रमण करता रहा दूसरे गरमीके मौसममें चार लगलग उसी कालेजके आँगनमें आये, चारोंने एक बारगी ही घरेलू लगलग पर आक्रमण किया । घरेला लगलग इस योग्य नहीं था कि, अकेला अपने वैरियोंका सामना करे, उस घरके रहनेवाले समस्त मुर्गे मुर्गियों और बत्तख इत्यादि घरेलू लगलगकी सहायता करने आये, उसको उसके वैरियोंके हाथसे बचा लिया । सब लोग उस घरेलू लगलगको विशेष सतर्कतासे रखने लगे कि, इस वर्ष वह फिर किसी प्रकारका कष्ट न पावे । पर तीसरे वसन्त ऋतुके आरम्भमें बीससे अधिक लगलग आये, कालेजके आँगनमें पहुँचके किसी मनुष्य अथवा पक्षीकी सहायता पहुँचनेके पूर्व ही उसको मारकर चले गये ।

देखो निबलको सब मारते हैं बलिष्ठको कोई नहीं मारता । लड़केने बन्दूक मारी थी उससे तो बदला ले नहीं सके पर घरेलू लगलगको व्यर्थ ही मार गये ।

घरेलू और बनैलेकी ईर्षा—हम्बर्ग नगरके निकट एक किसान रहता था । उसके पास एक घरेला लगलग था । एक दिन वह जड़लसे एक लगलग लाया अपने घरमें रक्खा । तब वह घरेला उस जड़लीसे बहुत विरोध करने लगा । घरेलूने बनैलेसे ऐसी ईर्षा की कि, उसको मार भगाया । चार मासके पीछे बनैला लगलग चार लगलगों सहित आया घरेलू लगलगको मारकर चला गया ।

लगलगोंका न्याय—फ्रांस देशका एक जर्जाह था । उसने चाहा कि, कहींसे एक लगलग मिल जावे तो अच्छा है । तुर्क लोगोंके लगलगकी प्रतिष्ठा करनेके कारण यह बात असंभव प्रतीत हुई । उसने एक लगलगके घोंसलेके सारे अण्डोंको चुरा लिया । उसके बदले मुर्गेके अण्डे रख दिये । अण्डे फूटे उनसे बच्चे निकले । लगलग स्त्री पुरुष दोनोंको बहुत आश्चर्य हुआ क्योंकि, बच्चे मुर्गेके थे । कुछ दिवसोंके पीछे नर लगलग चला गया, तीन दिनोंके पीछे लगलगोंकी बूहत मण्डली लेकर आया उसके सारे साथी लगलग घेरा बांधकर बैठ गये । वहाँ लगलगोंका बड़ा झुण्ड बैठा, सहस्रों मनुष्य यह कौतुक देखनेको एकत्रित हुये । लगलगी उस सभाके बीचमें बुलाई गई उसकी जाँच होनेके पीछे सब लगलग उस मादापर टूट पड़े, उसको मारकर चले गये ।