भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पेरू ।

सौतेली मांसे कष्ट—एक मादह पेरू जिसको कि, अङ्ग्रेजी भाषामें टर्को कहते हैं मारी गई । उसके बच्चे पल गये थे पर उड़ने योग्य नहीं हुए थे । कुछ दिनों तक उनका पिता उनको पालता रहा । जो कोई मनुष्य उसके घोंसलेके निकट आता तो वह चिल्लाता हुआ शब्द करता था । अन्तमें वह वहाँसे चला गया, दो तीन दिनतक अन्तर्धान रहा । फिर वह दूसरी मादा लेकर आया । इस अवसरमें वे बिचारे बच्चे भूखसे अधमुवे हो गये थे । उनकी सौतेली माँ आई तो उन बच्चोंको अत्यन्त आहत करके वृक्षके नीचे डाल दिया, उनमें दो बच्चे वृक्षकी जड़से लगे पड़े थे । उनमें थोड़ी जान थी । उनको लोगोंने ले जाकर एक स्थानमें पाला । उनके पर और बाल आये उनको स्वतंत्र कर दिया । वे कदापि दूर न जाते वहाँही रहा करते थे । पर दुष्ट सौतेली माता तथा पिताने उन्हें शीघ्रही पहचान लिया । वे उनपर आक्रमण किया करते थे । सौतेली माताके मेलसे उनका पिता भी वंरी हो गया था । वे दोनों तीन दिनतक उनपर बराबर आक्रमण करते रहे । बड़े सबेरे आकर बहुत बल तथा कड़ाईसे उनपर टूटते थे ।

गिनी फाउल ।

अङ्ग्रेजीमें गिनी फाउल नामका एक बड़ी जातिका मुर्ग है । उसकी एक मादा थी उसका नर मर गया । क्योंकि, उसको किसीने मार दिया था । कारण यह कि, वह छोटे-छोटे पक्षियोंकी बहुत हानि किया करता था । एक एक मादा बतख थी उसके कितनेही बच्चे थे । उस बतखको बाजने मार डाला उसके बच्चे अनाथ हो गये । उन अनाथ बच्चोंपर मादा गिनीफाउलने दया करके उनको पालना आरम्भ किया । यहाँतक कि, उनके मृत माता पितामे भी अधिक सावधान रहा करती थी । अत्यन्त आश्चर्यका विषय तो यह है कि, मादा गिनी फाउलने अपने स्वभावको छोड़कर बतखका स्वभाव धारण कर लिया था । बतखके छोटे छोटे बच्चे उसके पीछे पीछे फिरा करते । वह उन्हें एक क्षणके लिये भी पृथक् न किया करती । वे बच्चे अपने घोंसलेमें विश्राम करते तो वह पृथक् होती जब कभी कुत्ते समीप आते अथवा बालक उनको कष्ट देते तो समस्त बतखें चिल्लाने लगतीं, उस समय उनकी धर्ममाता जहाँ कहीं दूर होती वहाँसे दौड़कर शीघ्रही उनके निकट आ पहुँचती । इसी प्रकार उन बच्चोंकी अत्यन्त रक्षा तथा रखवाली किया करती । यद्यपि वह जड़ली चिड़िया थी तो भी यदि कोई लड़का उन बच्चोंके समीप जावे तो उसके पांवपर चोंच मारती थी, जिससे लड़कोंको बहुत भय रहता था । वह अपने धर्मके बच्चोंकी बहुत