भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 925

घरके बाहर लेजाके मार डाल । लौंडी तोता लेकर घरके बाहर निकली, तोतेने लौंडीकी खुशामद की कि, तू मुझे मत मार, मेरे बदले किसी दूसरे तोतेके शव दिखा दे. लौंडीके मनमें दया आ गई, तोतेको छोड़ दिया, वह उड़कर राजा रसालुके पास जा पहुँचा, रानीका सारा हाल तथा मैनाके मरने और अपने प्राण बचाकर निकल आनेकी सब बातें कह दी । राजा अपने महलमें तुरन्त पहुँचा चोरकी पकड़कर मार डाला । रानी अटारीसे गिरकर मर गई ।

रसालुका अन्तर्दृष्टि तोता—एक और राजा था उसका नाम सरकप था । इसका यह नाम इस कारण पड़ा कि, उसकी अत्यन्त सुंदरी एक लड़की थी । राजाने उसके निमित्त यह विज्ञापन दिया था कि, जो कोई मेरे साथ चौसर खेलकर बाजी जीत जावेगा उसको मैं अपनी पुत्री दे दूँगा, हार जाएगा तो मैं उसका शिर काट लूँगा, इसी प्रकार उसने कितने ही राजोंके शिर काट लिया । चौसरकी बाजीमें उसपर कोई विजयी नहीं हुआ ।

जब यह बात राजा रसालुने सुनी तो वह घोड़ेपर सवार होकर तोतेको अपने साथ लेकर अकेला सरकपकी ओर चला । राहमें जाते हुये एक झाहा मिला । तोतेने कहा कि, राजा ! इस झाहेको पकड़ ले, यह तेरे काम आवेगा. राजाने झाहेको अपने साथ लिया । आगे जाते हुये बिल्लीके बच्चे मिले । तोतेने कहा, राजा ! इन बच्चोंमेंसे एक लेले, यह भी काम देगा । कुछ दूर जाकर राजाने घोड़ेको वृक्षसे बांध दिया आप सो गया । उस स्थानपर बहुत विषैला सर्प रहता था । उसने बाँबीसे निकलकर राजाके स्वाँसको खींच लिया, राजा मर गया । उस सांपका मित्र कौवा था. सर्पने उससे कहा कि, इसके मांसको आनन्द पूर्वक खा। उस समय तोतेने झाहेसे कहा कि, अब तू देख ! हमारा राजा तो मर गया, कौआ हमारे राजाका मांस खाने जाता है, तू उसकी टांग पकड़ लेना जबतक इसराल सांप राजाके दमको फिर न छोड़े राजाको जीवित न करे तबतक कौवेकी टांग न छोड़ना । झाहा तोतेके कथनानुसार राजाकी दाढ़ीके नीचे छिपकर बैठ। क्योंकि, राजाकी दाढ़ी बहुत बड़ी थी । कौवा राजाकी छातीपर आकर बैठ चाह। कि, राजाकी आँख निकालकर खावे, उसी समय झाहाने राजाकी दाढ़ीके नीचेसे निकलकर कौवेकी टांग पकड़ली तथा अपने कांटोंको फैलाकर बैठ गया कौवेने बहुत बल किया पर उसकी टांग नहीं छूटी, बहुत फिरा, चिल्लाया पर कोई युक्ति काम न आई । कौवेके मित्र इसरालका कुछ बल नहीं था कि, झाहेसे उसकी टांग छुड़ाये । यदि इसराल झाहेपर अपना मुँह चलाये तो वह आप मर जाये । कौवा बहुत पुकारता पर झाहा न छोड़ता । तोता बोला कि, इसराल!