कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 976, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंसकते, न उनका मनही कभी निश्चल हो सकता है। मनुष्यके खाने पीनेके लिये जो शुद्ध पदार्थ नियत किये गये हैं, उनको खाने पीनेसे अन्तःकरण शुद्ध होता है। यद्यपि जड़ और चैतन्यमें एकही आत्मा है तो भी अङ्गुरजका भक्षण शुद्ध है। पाशुविक भोजनसे मन शुद्ध नहीं हो सकता पशु और मनुष्य दोनों भाई हैं, इस कारण, अपने भाईका मांस मत खाओ, भाईको मत मारो, उसका रक्त पात न करो, उसको दुःख देनेसे नरककी राह खुलेगी, सुख शांतिका मार्ग एकदम बन्द हो जावेगा; सत्यगुरु कभी कृपा भी न करेंगे।
मांस खाना और शराब पीना, अपने भाइयोंके रक्तपात करनेके बराबर है इसका बदला अवश्य देना पड़ेगा। जिस प्रकार मां, बहन, बेटो और स्त्री चारोंका रूप एकही है पर उनमें अपनी विवाहिता स्त्रीहीसे सम्भोग करनेकी आज्ञा है। दूसरीकी ओर दृष्टि उठाना भी महापाप है तब जो कोई अपनी विवाहिता स्त्रीके अतिरिक्त दूसरोंपर दृष्टि करेगा, वह अवश्य घोर नरकका वासी होगा। इसी तरह मनुष्यके खाने योग्य अंकुरज पदार्थ, भक्षण किये जाय तो अन्तःकरण अशुद्ध नहीं हो सकता। क्योंकि, वे मनुष्यके मुख्य भोजन हैं, भोजन किये बिना कोई जीवित नहीं रह सकता। इस कारण भोजनको कुछ चाहिये। अशुभ कर्मोंका फल अवश्य भोगना पड़ेगा, फल भोगे बिना छुटकारा नहीं हो सकता। कबीर साहिबने कहा है कि
साखी—कबीर कमाई आपनी, कभी न निषफल जाय।
सात समुन्दर आडा पड़े, मिले अगाऊं धाय ॥
संस्कृतके अनेक योग्य पुरुषोंके वचन है कि—“अवश्यमेव भोक्तव्यं कृतं कर्म शुभाशुभम्” किये कर्म अवश्य भोगने पड़ेंगे चाहे सात समुद्र बीचमें आजाय पर भोग नहीं टाल सकता।
बदलेपर दृष्टान्त—एक अङ्ग्रेजी समाचार पत्रके १८७९ के दिसम्बरके परचेमें लिखा था कि, अमेरिका देशका एक कसाई बहुत बीमार पड़ा, समस्त शरीरमें सूइयां चुभानेके समान कष्ट, होने लगा वह बहुत कुराने लगा। कष्टके मारे बहुत दुःखी हुआ, पर प्राण न निकले, उसी दशामें उसने जिनका बध किया, था, उन जीवधारियोंकी बहुत भयानक स्वरूपसे अपना बदला लेने उपस्थित देखा। उनके भयानक दृश्यको देखकर बहुत भयभीत हुआ. अनुमानकर लिया कि जिन जीवधारियोंका मैंने बध किया है वह मुझसे बदला लेने आये हैं।
वह उनसे बचनेका उपाय शोचने लगा. पर कोई न सूझा, अन्तमें अपने कमाईके दो लाख रुपयोंके नोटोंको इस विचारसे जला दिया कि, यह मेरे