कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)

कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
Devanagarihipublished2,136 पृष्ठ
पृष्ठ 715, कुल 2136 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 715
बोधसागर
( १३५ )
मूस विलाई एक सँग, कहु कैसे रहिजाय ॥ अचरज यक देखो संतो, हसती सिंहहि खाय ॥ २१ ॥ पूरण पिण्ड ब्रह्माण्डसो, त्रिगुण फांस लगाय ॥ नाशक नाशे जीवको, आपे आप कहाय ॥ २२ ॥ बन्दी छोड़ छुडावई, मेटि मेटि यम फांस ॥ धन्य धन्य सो जीव हैं, तजहिं महा भोगांस ॥ २३ ॥ प्रभु शरणागति परख दृढ, सत्य लोक परमान ॥ संसत जीव विलास है, दूटा काल गुमान ॥ २४ ॥ पारख सीढी झांकिके, उलटि बहे भवधार ॥ थाह न पावहिं बूडहीं, हो ताके निस्तार ॥ २५ ॥
इति