कबीर सागर (11 भाग संपूर्ण)
Kabir Sagar (11 Parts Complete)
by कबीर साहेब / खेमराज श्रीकृष्णदास
Source: खेमराज श्रीकृष्णदास प्रकाशन, बम्बई - कबीर सागर सम्पूर्ण ११ भाग · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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मुहम्मद बोध
मुहम्मद साहबको प्रणाम करनेको आये जहाँ वह बुराक बाँधकर जब भीतर गये तब वहाँ सब पैगम्बरोंकी आत्मा को देखा। फिरा एक सीढ़ी आकाशसे उतरी अरबी भाषामें जिसे मेसआराज कहते हैं फिर मुहम्मद साहब बुराकपर सवार होकर उस सीढ़ी के मार्ग से ऊपर को चढ़े। जब प्रथम आकाश पर पहुँचे तब वहाँका द्वार जिबराईल ने खुलवाया और सब भीतर गये। भीतर पहुँचने पर देखा कि, हजरत आदम बै हुए हैं और उनके बाई ओर नरकका द्वार खुला हुआ है और दहिनी ओर स्वर्गका। नरककी ओर देख कर हजरत आदम रोते हैं और स्वर्ग की ओर देखकर हँसते हैं। इस प्रकार से प्रत्येक आकाश पर होते हुए जिबराईल मुहम्मद साहब को जब सदरह के द्वार पर ले गये तब वहाँसे जिबराईल पीछे हो लिये। आगे चल कर एक सुनहले पर्व के निकट पहुँच कर जिबराईल ने कहा कि इससे आगे हम नहीं जा सकते आप स्वयम् जाइये। फिर वहाँ से मुहम्मद साहब ने अकेले सत्तर मंजिल पार किया। सत्तर पर्व पार होकर बुराक भी ठहर गया और वहाँ से एक पक्षी जिसे जफ जफ कहते हैं आया और उस पर चढ़ कर मुहम्मद साहब खुदाके पास गये और वहाँ उन्हों ने खुदा से बहुत कुछ वार्तालाप किया और अपने धर्मके सब नियम उनको वहाँहीसे मिले जिसको लेकर वह लौट कर अपने स्थान पर चले आये। इस स्थान पर लिखा है कि यह सब बातें इतनी जलदी हुई थीं कि, मुहम्मद साहेब के बुराक पर सवार होकर जाते समय एक कटोराको धक्का लगा था जो पानी से भरा हुआ था। सो धक्का लगतेही वह टेढ़ा हो गया था। मुहम्मद साहेब इतनी जल्दी लौटकर आये कि उस कटोरे का पानी अभीतक गिरने नहीं पाया था और